Sunday, April 26, 2026
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भारतीय संस्कृति और संस्कार का संवर्धन संस्कृत एवं वेद शिक्षा में निहित है: आचार्य संत जैन मुनि जी महाराज

कैमोर। विश्व का शाश्वत सत्य प्रथम विश्वविद्यालय तक्षशिला विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। जहां चाणक्य जैस मनीषी ने शिक्षा प्राप्त की। आज ठाकुर रामराजा सरकार का मंगल सानिध्य संडे मार्केट कैमोर स्थित अग्रज श्री अनिल शर्मा जी के आवास में प्रवासित संत त्रय जैन मुनियों के दर्शनोंपरान्त उक्त आशय के उद्गार व्यक्त करते हुए विजयराघवगढ के श्री संकट मोचन जगन्नाथ धाम स्थित श्री गरुड़ध्वज संस्कृत विद्यालय एवं श्री जगन्नाथ वेद विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों के लिए कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कार का संवर्धन संस्कृत एवं वेद शिक्षा में निहित है।

जैन संतो का जीवन त्याग और तपस्या से भरा होता है। वे सांसारिक सुखों को त्याग देते हैं। और अपने जीवन को केवल आत्म अनुशासन और ज्ञान प्राप्त करने के लिए समर्पित कर देते हैं।उनकी शिक्षाएं और जीवन शैली लोगों सांसारिक मोह – माया से दूर रहने और आत्म ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है। इसीलिए कहा गया है संत न होते जगत में जरि जातो संसार।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम