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कटनी में गुप्ता गैस एजेंसी का कारनामा: 23 मार्च की बुकिंग ‘डिलीवर्ड’ दिखी, उपभोक्ताओं को नहीं मिला सिलेंडर, ठीकरा सिस्टम पर फोड़ा

कटनी में गुप्ता गैस एजेंसी का कारनामा! 23 मार्च की बुकिंग ‘डिलीवर्ड’ दिखी, उपभोक्ताओं को नहीं मिला सिलेंडर, ठीकरा सिस्टम पर फोड़ा

कटनी में गुप्ता गैस एजेंसी का कारनामा! 23 मार्च की बुकिंग ‘डिलीवर्ड’ दिखी, उपभोक्ताओं को नहीं मिला सिलेंडर, ठीकरा सिस्टम पर फोड़ा। Katni में गुप्ता गैस एजेंसी के खिलाफ उपभोक्ताओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। एक नहीं बल्कि कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उनकी गैस बुकिंग सिस्टम में “डिलीवर्ड” दिख रही है, जबकि उन्हें सिलेंडर मिला ही नहीं। और तो और वीआईपी को बिना लाइन हाथ जोड़कर दिया जा रहा है।

कटनी में गुप्ता गैस एजेंसी का कारनामा: 23 मार्च की बुकिंग ‘डिलीवर्ड’ दिखी, उपभोक्ताओं को नहीं मिला सिलेंडर, ठीकरा सिस्टम पर फोड़ा

 क्या कह रहे हैं उपभोक्ता?

कई उपभोक्ताओं का दावा: 23 मार्च को बुकिंग ‘डिलीवर्ड’ दिख रही है लेकिन सिलेंडर हमें नहीं मिला है। लगातार एजेंसी के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिल रहा। कभी सुबह 8 बजे  का समय देंगे तो कभी दोपहर सवा तीन बजे का फिर बोलेंगे कल आना देखते है।

 एजेंसी पर गंभीर आरोप

शिकायत करने पर कथित तौर पर जवाब मिला: “सरकार कर रही है, हमसे मत पूछो जहां शिकायत करनी है करो। उपभोक्ताओं को कथित रूप से सिक्योरिटी फीचर्स खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

 दोहरी मार झेल रहे लोग

सिलेंडर नहीं मिलने से रोजमर्रा की परेशानी, मजबूरी में महंगे दाम पर बाहर से गैस खरीदनी पड़ रही है।आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। 945 का सिलेंडर 3 हजार में तुरन्त मिल जाएगा वह भी घर बैठे।

 उठते सवाल

  • “डिलीवर्ड” दिख रहा सिलेंडर आखिर गया कहां?
  • क्या एजेंसी में गड़बड़ी या बड़ा घोटाला?
  • प्रशासन कब लेगा एक्शन?

कटनी में गैस एजेंसी को लेकर सामने आए ये आरोप बेहद गंभीर हैं। अगर समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो आम उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ सकती है।

शहर की अन्य गैस एजेंसियों की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है, लेकिन इस एजेंसी में कनेक्शनों की अधिक संख्या और प्रभावशाली परिवार से जुड़े होने के कारण अव्यवस्था और मनमानी ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रही है।

सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर खड़ा हो रहा है। बंद कमरों में बैठकों और दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बदतर है। अब तक जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।

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