उदयपुर घराने की बेटी पर चली सतना में गोली: नागौद रियासत की परसमनिया गढ़ी में सौतन ने चलाई पिस्टल, आरोपी सुनीता सिंह जेल भेजी गई
MP Royal Dispute: नागौद राजघराने की गढ़ी में क्यों चली गोली? जानें 600 साल पुराने परिहार राजवंश के इस महल-विवाद का पूरा सच
सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक ऐसी हैरान करने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मचा दिया है। विंध्य क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित और हाई-प्रोफाइल ‘नागौद राजघराने’ की बहू पर सरेआम गोली चल गई।
इस खूनी वारदात के पीछे की वजह कोई बाहरी दुश्मनी नहीं, बल्कि राजघराने के भीतर सालों से सुलग रही आपसी कलह और ‘सौतन’ की जंग है। यह पूरा मामला नागोद रॉयल फैमिली से जुड़े पूर्व मंत्री और वर्तमान कद्दावर विधायक नागेंद्र सिंह के भतीजे रूपेंद्र सिंह उर्फ ‘बाबा राजा’ की दो पत्नियों के बीच का है।
सुलह करने पहुंची थीं उदयपुर घराने की बहू, दूसरी पत्नी ने तान दी पिस्टल
पुलिस और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे हाई-प्रोफाइल गोलीकांड की इनसाइड स्टोरी बेहद चौंकाने वाली है:उदयपुर घराने की बेटी पर चली सतना में गोली: नागौद रियासत की परसमनिया गढ़ी में सौतन ने चलाई पिस्टल, आरोपी सुनीता सिंह जेल भेजी गई
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विवाद सुलझाने की कोशिश: रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा की पहली पत्नी योगिता सिंह, जो राजस्थान के सुप्रसिद्ध उदयपुर शाही घराने से ताल्लुक रखती हैं, पिछले कुछ समय से चल रहे पारिवारिक और संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए परसमनिया गढ़ी पहुंची थीं।
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बातचीत के बीच चली गोली: गढ़ी के भीतर बातचीत के दौरान ही बाबा राजा के साथ रह रही उनकी दूसरी पत्नी सुनीता सिंह से योगिता सिंह की तीखी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि सुनीता सिंह ने तैश में आकर योगिता सिंह पर जानलेवा हमला करते हुए सीधे गोली चला दी।
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हड़कंप के बाद गिरफ्तारी: राजघराने की बहू पर गोली चलने की खबर हवा की तरह फैली और पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी दूसरी पत्नी सुनीता सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
उचेहरा से नागौद तक: क्या है इस ऐतिहासिक राजघराने का इतिहास?
इस खूनी वारदात के बाद से ही गूगल और सोशल मीडिया पर लोग मध्य प्रदेश के इस ऐतिहासिक राजघराने के इतिहास को खंगाल रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है नागौद रियासत की पूरी कहानी:
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14वीं सदी से नाता: सतना जिले में स्थित नागौद राजघराने का इतिहास सालों पुराना है। यह घराना राजपूतों के परिहार वंश से ताल्लुक रखता है। माना जाता है कि ये राजपूत परिहार वंश कन्नौज के प्रसिद्ध गुर्जर-प्रतिहारों के ही वंशज हैं।
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संस्थापक राजा: इस शाही रियासत की स्थापना सन 1344 ईस्वी में राजा वीरराज जूदेव द्वारा की गई थी।उदयपुर घराने की बेटी पर चली सतना में गोली: नागौद रियासत की परसमनिया गढ़ी में सौतन ने चलाई पिस्टल, आरोपी सुनीता सिंह जेल भेजी गई
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ऐसे बदला नाम: शुरुआत में इस रियासत को ‘उचेहरा’ नाम से जाना जाता था। लेकिन सन 1720 में इस राजवंश की राजधानी को स्थानांतरित किया गया और रियासत का नाम बदलकर ‘नागौद’ कर दिया गया।
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भारत संघ में विलय: भारत की आजादी के बाद इस रियासत के आखिरी आधिकारिक शासक श्रीमंत महेंद्र सिंह जू देव बहादुर थे। उन्होंने ही 1 जनवरी 1950 को अपनी रियासत का भारतीय संघ में विलय करने के ऐतिहासिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।
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वर्तमान कमान: शाही परिवार के वर्तमान प्रमुख राजा श्रीमंत शिवेंद्र सिंह जू देव बहादुर हैं, जो अगस्त 2005 से इस सदियों पुरानी विरासत और गढ़ी की कमान संभाल रहे हैं।








