सरकारी नौकरी में दो-बच्चों की शर्त हटेगी, प्रोबेशन नियमों में भी बड़ा बदलाव प्रस्ताव भी कैबिनेट में आएगा

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए लागू अधिकतम दो बच्चों की शर्त को समाप्त करने की तैयारी है। इस संबंध में प्रस्ताव को अंतिम निर्णय के लिए शीघ्र ही राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से परामर्श के बाद नियमों में संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया है।
इसके साथ ही सेवा नियमों में एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रस्तावित है। नए प्रावधान के तहत परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि पूरी होने के बाद छह माह के भीतर ही कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। यह प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 26 जनवरी 2001 से यह नियम लागू है कि तीसरी संतान होने पर व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा। वहीं, जो कर्मचारी पहले से सेवा में हैं, उनकी निर्धारित अवधि के बाद तीसरी संतान होने पर सेवा समाप्त करने का भी प्रावधान रहा है। इस नियम के चलते कई कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी। यह व्यवस्था उस समय लागू की गई थी, जब राज्य में प्रजनन दर काफी अधिक थी।
हालांकि, समय के साथ जनसांख्यिकीय स्थिति में बदलाव आया है। सितंबर 2025 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन-2023 के अनुसार मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, यानी एक दंपती औसतन 2.4 बच्चों का जन्म दे रहा है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 दर्ज की गई है। वहीं, देश की औसत टीएफआर 1.9 है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने पहले ही इस तरह के प्रावधानों में संशोधन कर दो-बच्चों की शर्त हटा दी है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी प्रजनन दर के संदर्भ में लगातार तीन बच्चों की आवश्यकता पर चर्चा करते रहे हैं।
सरकार का मानना है कि बदली हुई जनसंख्या संरचना और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए नियमों में संशोधन समय की मांग है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद नए नियमों को लागू किया जाएगा।








