अदीना मस्जिद या आदिनाथ शिव मंदिर?- मालदा में बढ़ा तनाव; 300 पुलिसकर्मी और ड्रोन तैनात, हाईकोर्ट में विचाराधीन मामला

अदीना मस्जिद या आदिनाथ शिव मंदिर?- मालदा में बढ़ा तनाव; 300 पुलिसकर्मी और ड्रोन तैनात, हाईकोर्ट में विचाराधीन मामला

अदीना मस्जिद या आदिनाथ शिव मंदिर?- मालदा में बढ़ा तनाव; 300 पुलिसकर्मी और ड्रोन तैनात, हाईकोर्ट में विचाराधीन मामला

मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा (पांडुआ) स्थित लगभग 650 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक अदीना मस्जिद को लेकर क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल बन गया है। हिंदू संगठनों द्वारा इसे ‘आदिनाथ शिव मंदिर’ बताए जाने और यहाँ पूजा-अर्चना की मांग तेज होने के बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है।

हाल ही में राज्य सभा सांसद और पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्जी द्वारा संसद में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद से ही विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस स्थल की वापसी की मांग तेज कर दी है।

 ‘हिंदू सुरक्षा समिति’ का पूजा का आह्वान; ड्रोन से हो रही निगरानी

सावन महीने के सोमवार के अवसर पर ‘हिंदू सुरक्षा समिति’ नामक संगठन द्वारा विवादित परिसर के समीप भगवान शिव के रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का आह्वान किया गया था। इसके बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गया:

 स्थापत्य कला और हिंदू संगठनों के दावे

हिंदू संगठनों का दावा है कि इस ऐतिहासिक संरचना में पाल-सेना कालीन स्थापत्य कला के अवशेष मौजूद हैं।

  1. ऐतिहासिक संदर्भ: बंगाल सल्तनत के दौरान 1364 से 1374 ईस्वी के बीच निर्मित इस मस्जिद को टेराकोटा (पकी मिट्टी) की सजावट वाली बंगाल की पहली इस्लामी संरचना माना जाता है।

  2. कलात्मक तत्व: मस्जिद की नक्काशी में जहाँ मध्य एशियाई प्रभाव है, वहीं चैत्य खिड़कियाँ, मंदिर की घंटियों के डिज़ाइन, जंजीरों की पंक्तियाँ और कमल की पंखुड़ियाँ जैसे तत्व दिखाई देते हैं।

  3. दावा: हिंदू संगठनों का कहना है कि परिसर के निर्माण अवशेषों में गणेश जी की मूर्ति और शिवलिंग के स्पष्ट चिह्न विद्यमान हैं।

ASI संरक्षण और 1991 का कानून

उल्लेखनीय है कि अदीना मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित एक राष्ट्रीय स्मारक है। ‘उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991’ (Places of Worship Act, 1991) के तहत 15 अगस्त 1947 को मौजूद किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप (Religious Character) में बदलाव करने पर कानूनी रोक है। फिलहाल प्रशासन ने आम जनता से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।

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