सीजफायर के सन्नाटे में गूंज उठी नागार्जुन की मछलियों की पुकार, जब बंदूकें थमीं; तो कवि की आवाज़ सुनाई दी
सीजफायर के सन्नाटे में गूंज उठी नागार्जुन की मछलियों की पुकार, जब बंदूकें थमीं; तो कवि की आवाज़ सुनाई दी।
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