संप्रेषणा नाट्य मंच, कटनी द्वारा संप्रेषणा नाट्य गृह में स्वांग “एम. ए. थर्ड डिवीजन” का सफल एवं अत्यंत सराहनीय मंचन
संप्रेषणा नाट्य मंच, कटनी द्वारा संप्रेषणा नाट्य गृह में स्वांग “एम. ए. थर्ड डिवीजन” का सफल एवं अत्यंत सराहनीय मंच
कटनी -संप्रेषणा नाट्य मंच, कटनी द्वारा संप्रेषणा नाट्य गृह में स्वांग “एम. ए. थर्ड डिवीजन” का सफल एवं अत्यंत सराहनीय मंचन किया गया। यह प्रस्तुति विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित एवं वसंत देव द्वारा अनूदित नाटक “जाति ही पूछो साधु की” पर आधारित रही।
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, कला प्रेमियों एवं युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। नाटक ने अपने प्रभावशाली संवाद, सशक्त अभिनय और सामाजिक व्यंग्य के माध्यम से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा तथा कई दृश्यों पर तालियों की गूंज सुनाई दी।
नाटक में मुख्य किरदारों ने विशेष रूप से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। महिपत के किरदार में आकाश तिवारी ने अपने प्रभावशाली संवाद अदायगी और गहन भाव-प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं नलिनी के किरदार में शिवानी अहिरवार ने अपनी स्वाभाविक अभिनय शैली और भावनात्मक गहराई से पात्र को जीवंत बना दिया कक्का के रूप में के.एल राव ने अपने अनुभवी अभिनय से मंच पर सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि बबना के किरदार में सादात भारती ने अपनी शानदार टाइमिंग, हाव-भाव और सहज अभिव्यक्ति से दर्शकों को खूब गुदगुदाया और पूरे नाटक में अलग ही ऊर्जा बनाए रखी।
अन्य कलाकारों — योगेश तिवारी, ऋषि परौहा, आदित्य गोस्वामी, अनुज मिश्रा, सतीश अहिरवार, शिवा रजक, दीवायांशु जायसवाल,शिवम रजक, हर्ष श्रीवास्तव, वान्या मालवीय, आशु, हार्दिक, आदी एवं कार्तिक — ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं को बखूबी निभाते हुए नाटक को पूर्णता प्रदान की। प्रस्तुति का तकनीकी पक्ष भी अत्यंत प्रभावी रहा। लाइट्स की सटीक व्यवस्था ने प्रत्येक दृश्य के भावों को उभारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं रूपसज्जा (मेकअप एवं वेशभूषा) ने पात्रों को यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया।
नाटक का निर्देशन द्रारिका दाहिया द्वारा किया गया, जो पूरी प्रस्तुति की आत्मा के रूप में उभरकर सामने आया। उनके सशक्त निर्देशन, सटीक दृश्य संयोजन और कलाकारों से उत्कृष्ट अभिनय निकलवाने की क्षमता ने नाटक को एक नई ऊंचाई प्रदान की। प्रत्येक दृश्य में उनकी गहरी समझ और प्रस्तुति की बारीकी साफ नजर आई, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। वहीं संगीत संयोजन गणेश माथुर द्वारा किया गया ताल वाद्य में विनोद सूर्यवंशी रहे, जिसने नाटक के भावों को और अधिक प्रभावी एवं जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियो के रूप में राजेंद्र सिंह,कपिल जी,जोधाराम जयसिंघानी,अरविंद तिवारी,अजय प्रताप सिंह,जुगल मिश्रा, रोज़लीन शाह,अंकिता तिवारी द्वारा कलाकारों के अभिनय, निर्देशन एवं पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की गई।
इस अवसर पर द्वारिका दहिया जी द्वारा सभी अतिथियों, कलाकारों, तकनीकी टीम एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। दर्शकों से मिली जोरदार सराहना ने संप्रेषणा नाट्य मंच को भविष्य में और भी उत्कृष्ट एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े नाटकों की प्रस्तुति के लिए प्रेरित किया।








