ब्लैकबक-चिंकारा शिकार गिरोह के मास्टरमाइंड को झटका, हाई कोर्ट ने दूसरी जमानत याचिका भी की खारिज

ब्लैकबक-चिंकारा शिकार गिरोह के मास्टरमाइंड को झटका, हाई कोर्ट ने दूसरी जमानत याचिका भी की खारिज

ब्लैकबक-चिंकारा शिकार गिरोह के मास्टरमाइंड को झटका, हाई कोर्ट ने दूसरी जमानत याचिका भी की खारिज

कटनी । स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को वन्यजीव अपराधों के खिलाफ एक और बड़ी कानूनी सफलता मिली है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने ब्लैकबक (कृष्ण मृग) और चिंकारा का अवैध शिकार कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तस्करी करने वाले संगठित गिरोह के मुख्य आरोपी आज़ाद सिंह सोलंकी उर्फ चिंटू बना की दूसरी नियमित जमानत याचिका भी खारिज कर दी है।

न्यायालय के इस फैसले को एसटीएसएफ की वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 6 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट ने आरोपी की पहली जमानत याचिका भी निरस्त कर दी थी।

भोपाल-व्यावरा हाईवे से हुई थी गिरफ्तारी

मास्टरमाइंड आज़ाद सिंह सोलंकी को एसटीएसएफ (इंदौर) ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज वन अपराध क्रमांक 237/22 में गिरफ्तार किया था।

  • कैसे हत्थे चढ़ा आरोपी: 14 नवंबर 2025 को एसटीएसएफ मुख्यालय और भोपाल इकाई की एक संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को भोपाल-व्यावरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पीलूखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र के पास घेराबंदी कर दबोचा गया था।

  • आरोपी तब से लगातार न्यायिक हिरासत (जेल) में है। इस पूरे सिंडिकेट में अब तक कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मामले की आगे की जांच तेजी से चल रही है।

कोर्ट में हुई तीखी बहस, एसटीएसएफ ने किया कड़ा विरोध

सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की थी। वहीं दूसरी तरफ, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और सहायक लोक अभियोजन अधिकारी ने अपराध की गंभीरता, वन्यजीवों के अवैध शिकार और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े तस्करी के नेटवर्क का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले से जुड़े दस्तावेजों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी की दूसरी जमानत याचिका (MCRC-29129/2026) को भी पूरी तरह से निरस्त कर दिया। एसटीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के शिकार और तस्करी के खिलाफ उनकी यह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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