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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर “विज्ञान में महिलाओं की भूमिका: विकसित भारत की प्रेरक शक्ति” विषयक संगोष्ठी एवं विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर “विज्ञान में महिलाओं की भूमिका: विकसित भारत की प्रेरक शक्ति” विषयक संगोष्ठी एवं विविध प्रतियोगिताओं का आयोज

कटनी। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर PMCOE शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी में यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार वाजपेई की अनुशंसा पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर नोबेल पुरस्कार विजेता महान वैज्ञानिक सी वी रमन को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके वैज्ञानिक योगदान और ‘रमन प्रभाव’ की ऐतिहासिक खोज को याद किया गया।

विज्ञान में महिलाओं की भूमिका: विकसित भारत की प्रेरक शक्ति
विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का उद्देश्य विज्ञान के महत्व, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार तथा विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करना था।

संगोष्ठी में समाजशास्त्र विभाग से डॉ. आर.पी. मिश्रा ने विज्ञान को सामाजिक परिवर्तन और तार्किक चेतना का आधार बताते हुए कहा कि विज्ञान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज में समानता और प्रगति की नई दिशा प्रदान करती है।

भौतिक शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. एम.पी. यादव ने विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया तथा छात्र-छात्राओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित किया।

अंग्रेजी विभाग से श्री जी.एम. मुस्तफा ने विज्ञान के प्रभावी संप्रेषण में भाषा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यापक रूप से सामने लाना आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी प्रेरित हो सके।

प्रशासनिक अधिकारी डॉ. माधुरी गर्ग ने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और रचनात्मकता को अपनाने का आह्वान किया तथा छात्राओं को विज्ञान में नेतृत्व की भूमिका निभाने हेतु प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री जय शंकर सिंह, सहायक प्राध्यापक (प्राणिशास्त्र विभाग), PMCOE शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बुढार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत की संकल्पना तभी साकार होगी, जब विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य विज्ञान जैसे क्षेत्रों में महिलाओं का योगदान राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।

इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा रंगोली प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता एवं नाट्य प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया, जिसमें विज्ञान में महिलाओं की भूमिका और विकसित भारत की अवधारणा को सृजनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया।

आज के इस अयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा और उसके संयोजक डॉ अतुल कुमार का भी सराहनीय योगदान रहा।आज के इस संपूर्ण कार्यक्रम में संयोजक की भूमिका में वनस्पति शास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो ज्योत्सना आठ्या रहीं।कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्ञानेंद्र मोहन श्रीवास्तव ने प्रभावी ढंग से किया।कार्यक्रम में प्रो. विनय वाजपेई, प्रो. व्ही.के. द्विवेद, प्रो. ज्योत्सना आठ्या, प्रो. आर.पी. सिंह, प्रो. संगीता बसरानी, डॉ. धीरज कुमार, पुनर्वसु भट्टाचार्य, राजेश साहू, सुनील सिंह, डॉ. सूचि सिंह, डॉ. शैलजा कटारे, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. शोभाराम पाटिल, डॉ. बी.एस. राजपुत, ज्योत्सना पाठक सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संगोष्ठी का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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