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Remdesivir Injection: बिना जरुरत के रेमडेसिविर देने से लीवर पर पड़ सकता है असर

इंदौर, Remdesivir Injection। कोविड संक्रमित हर मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने की जरुरत नहीं होती है। बिना जरुरत के किसी को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाए तो उसके लीवर पर असर पड़ सकता है। कोविड संक्रमित मरीज जिसके चेस्ट में 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा संक्रमण हो या उसे डायबिटिज, हाइपरटेंशन हो, ऐसे मरीज को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। ये बाते अरबिंदो अस्पताल के डायरेक्टर डा. विनोद भंडारी ने शनिवार को रेसीडेंसी कोठी में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहीं। उन्होंने बताया कि इस इंजेक्शन को मरीज को लगाने के पहले लीवर फंक्शन टेस्ट किया जाना चाहिए। कोई भी व्यक्ति अपने मनमर्जी या घर पर यह इंजेक्शन न ले।

वर्तमान में इस इंजेक्शन की जो कमी आई है, उसकी वजह यह है कि लोगों ने जरुरत न होने पर भी अपने घर में इस इंजेक्शन का स्टाक यह सोचकर कर लिया है कि न जाने कब उन्हें या परिजनों को इसकी जरुरत पड़ जाए। ऐसे में शासन को यह इंजेक्शन दवा दुकानों को देने के बजाए सीधे अस्पतालों को ही देना चाहिए। डीजीसीआई ने रेमडेसीवीर इंजेक्शन के इमरजेंसी में ही उपयोग करने के निर्देश दिए है। इस वजह से इसे आउटडोर या घर में उपयोग नहीं करना चाहिए।

इंजेक्शन की आवश्यकता व उपयोग पर नियंत्रण की है जरुरत

एमजीएम मेडिकल कालेज के मेडिसीन विभाग के एचओडी डा. वीपी पांडे ने बताया कि सभी डाक्टरों को इस बात का ध्यान रखना है कि यदि कोविड संक्रमित मरीज का आक्सीजन सेचुरेशन 94 प्रतिशत से कम हो और उसके फेफड़ों में संक्रमण 25 प्रतिशत से अधिक हो तो ही उसे रेमडेसीवीर इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। वर्तमान में रेमडेसीविर की अनावश्यक व उपयोग पर नियंत्रण करने की जरुरत है। इस इंजेक्शन को चिकित्सकों की सलाह से ही लगाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि शहर के अस्पतालों में बडी संख्या में ऐसे मरीज इकटठे हो रहे है।

जिन्हें इलाज के उपरांत भी परिजन अपने घर ले जाना नहीं चाहते है। इसके पीछे परिजनों का तर्क रहता है कि घर में छोटे बच्चे है, अभी तो आप मरीजों को कुछ दिन ओर अस्पताल में रखे। रेसीडेंसी कोठी में हुई पत्रकार वार्ता में चाचा नेहरु अस्पताल के अधीक्षक डा. हेमंत जैन, मेडिकल कालेज के डीन डा संजय दीक्षित, आईएम के अध्यक्ष डा. सतीश जोशी और आईएमए के पूर्व उपाध्यक्ष डा. संजय लोंढे शामिल हुए। डा. लोंढे ने बताया कि संक्रमण होने के शुरुआत आठ दिन के लिए ही रेमडेसीवीर इंजेक्शनउपयोगी है। इसके बाद इसे अनावश्यक न लगवाए।

इन बातों का रखे विशेष ध्यान

  • बुखार आने पर तुरंत डाक्टर को दिखाए और घर में आइसोलेट हो जाए।

  • बुखार आने के तीसरे से पांचवे दिन कोविड जांच हो जाना चाहिए। पहले दिन बुखार पर कोविड पाजिटिव आने की संभावना कम होती है।

  • आरटीपीसीआर जांच 80 मामलों में पाजिटिव व 20 फीसदी मामलों में बीमारी होने के बाद भी तकनीकी कारण से निगेटिव आती है। इसका मतलब यह नहीं कि निगेटिव रिपोर्ट वाले एकदम ठीक है, उन्हें भी घर में पांच दिन आइसोलेट रहना चाहिए।

  • घर में एक भी व्ययक्ति पाजिटिव आए तो सभी परिजनों को कम से के कम 6 दिन घर में रहना चाहिए।

  • पाजिटिव रिपोर्ट को फोन पर डाक्टर से संपर्क करना चाहिए, डाक्टर बोले तो ही क्लिनिक आना चाहिए।

  • पांचवे दिन के बाद बुखा न उतरे, आक्सीजन 94 प्रतिशत से कम आए तो ही डाक्टर की सलाह पर सिटी चेस्ट करना चाहिए। पहले दिन कभी सिटी स्कैन न करवाए।

-सभी मरीजों को भर्ती होने या रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरुरत नहीं होती।

  • लगतार बुखार, श्वास में तकलीफ, आक्सीजन 94 प्रतिशत से कम होने, रक्त की जांचे गड़बड़ होने पर, सिटी चेस्ट में 25 प्रतिशत से अधिक बीमारी होने पर रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरुरत होती है।

  • अस्पताल की ओपीडी में डे केयर सुविधा के तहत 2 से 3 घंटे के आब्जर्वेशन में ही लगवाएं।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम