धार्मिक मान्यताएं: कलाई पर बंधा कलावा कितने दिन में बदलना चाहिए? जानें इसे उतारने और धारण करने के नियम

धार्मिक मान्यताएं: कलाई पर बंधा कलावा कितने दिन में बदलना चाहिए? जानें इसे उतारने और धारण करने के नियम

धार्मिक मान्यताएं: कलाई पर बंधा कलावा कितने दिन में बदलना चाहिए? जानें इसे उतारने और धारण करने के नियम

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, हवन और मांगलिक कार्यों के दौरान कलाई पर कलावा (मौली या रक्षासूत्र) बांधने की प्राचीन परंपरा है। लाल और पीले रंग का यह धागा केवल एक सामान्य सूत्र नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, शुभता और भगवान के रक्षा कवच का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और तीनों देवियों (लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा) का वास होता है, जो व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाते हैं।

कलावा बांधने के बाद इसे कब तक पहने रखना चाहिए और इसे उतारने-बदलने के क्या नियम हैं, आइए जानते हैं:

कलावा कितने दिन तक बांधकर रखना चाहिए?

  • 21 दिनों की परंपरा: धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, हाथ में बंधे कलावे को लगभग 21 दिनों के बाद बदलने या उतारने की सलाह दी जाती है।

  • अन्य परिस्थितियां: यदि धागा बहुत गंदा हो जाए, उसका रंग उतर जाए या वह टूटने लगे, तो उसे 21 दिन से पहले भी बदला जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं के अनुसार इसे धारण करने की अवधि भिन्न हो सकती है, इसलिए 21 दिन का नियम अनिवार्य नहीं है।

कलावा उतारने के लिए कौन-सा दिन शुभ?

  • मंगलवार और शनिवार: धार्मिक मान्यताओं में पुराना कलावा उतारने या नया बदलने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • नया कलावा किसी भी पूजा, अनुष्ठान या पारिवारिक मांगलिक अवसर पर पुनः धारण किया जा सकता है।

किस हाथ में बांधना चाहिए कलावा?

  • पुरुष और अविवाहित कन्याएं: इनकी दाहिनी (Right) कलाई पर कलावा बांधने का विधान है।

  • विवाहित महिलाएं: सुहागिन महिलाओं की बाईं (Left) कलाई पर कलावा बांधा जाता है।

उतारने के बाद पुराने कलावे का क्या करें?

कलावा को कभी भी आम कचरे या कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए। इसे सम्मानपूर्वक उतारकर किसी पवित्र स्थान पर रखें या गमले/बगीचे की मिट्टी में दबा दें।