क्यों कम हो रहा है घर पर मेहमानों को बुलाने का चलन? सोशल मीडिया के दबाव और भागदौड़ के बीच बदल रहे रिश्ते
नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में लोगों के पास स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन एंटरटेनमेंट के अनगिनत साधन उपलब्ध हैं। लेकिन इस तकनीकी क्रांति के बीच दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ आमने-सामने बैठकर समय बिताने की पुरानी परंपरा धीरे-धीरे गायब होती दिख रही है। पहले जहाँ घर पर दोस्तों को चाय पर बुलाना, परिवार के साथ भोजन करना या अचानक किसी पड़ोसी के घर पहुँच जाना आम बात थी, वहीं अब किसी को घर बुलाने से पहले लोग कई बार सोचने पर मजबूर हैं।
गार्जियन की रिपोर्ट: घर पर दावत देने के आंकड़ों में 70% की गिरावट
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में नियमित रूप से घर पर लोगों को बुलाने वाले लोगों का आंकड़ा 1975 में 42% था, जो 2026 में घटकर महज 12% रह गया है। यानी इस परंपरा में करीब 70% की बड़ी गिरावट आई है। ब्रिटेन में 2,000 लोगों पर किए गए एक सर्वे में 10 में से 4 से अधिक लोगों ने स्वीकार किया कि वे घर पर मेहमान बुलाने से बचते हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह मेहमानों के जाने के बाद घर की सफाई का सिरदर्द है।
घर पर मेहमान न बुलाने के मुख्य कारण
सोशल मीडिया का दबाव और ‘परफेक्ट होम’ की होड़: सोशल मीडिया पर सजे-धजे घर, महंगी इंटीरियर डेकोरेशन और शानदार खान-पान की तस्वीरें देखकर लोगों में एक अनजाना दबाव बन गया है। सामान्य घर होने या बर्तन-कपड़े बिखरे होने पर लोग शर्मिंदगी महसूस करते हैं और तुलना के डर से किसी को बुलाने से कतराते हैं।
समय की भारी कमी: नौकरी, बच्चों की देखभाल और वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) के चलते छुट्टियां भी व्यस्तता में निकल जाती हैं। शहरों में बढ़ती दूरी और ट्रैफिक के कारण महज 30 मिनट का सफर भी मिलने-जुलने में रुकावट बन जाता है।
दावत देना अब ‘काम’ जैसा: मेहमानों के आने से पहले घर चमकाना, खाना पकाना और जाने के बाद फिर से सारे बर्तन और घर समेटना लोगों को थकाऊ और अतिरिक्त जिम्मेदारी लगता है।
बढ़ता आर्थिक खर्च: अलग-अलग पसंद का खाना बनाना, राशन जुटाना और तैयारियां करना महंगा पड़ता है।
अकेले रहने की आदत: स्क्रीन, ऑनलाइन फिल्मों और पर्सनल स्पेस के कारण लोग घर पर अकेले रहने में ज्यादा सहज महसूस करने लगे हैं। क्यों कम हो रहा है घर पर मेहमानों को बुलाने का चलन? सोशल मीडिया के दबाव और भागदौड़ के बीच बदल रहे रिश्ते
बाहर कैफे या रेस्टोरेंट में मिलना बना आसान विकल्प
इन सभी झंझटों से बचने के लिए अब लोग बाहर किसी कैफे, रेस्टोरेंट या न्यूट्रल वेन्यू पर मिलना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रेस्टोरेंट में बिना किसी तैयारी या बाद की सफाई के हर कोई अपनी पसंद का खाना चुन सकता है और दोनों पक्ष आराम से बैठकर समय बिता सकते हैं।
रिश्तों की गर्माहट पर पड़ रहा असर
समाजशास्त्रियों और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि घर पर मिलना सिर्फ साथ खाना खाने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बिना किसी जल्दबाजी के एक-दूसरे के करीब आने और अपनापन जताने का ज़रिया था। जब लोग एक-दूसरे के घर जाना बंद कर देते हैं, तो रिश्तों में वो आत्मीयता कम होने लगती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि घर को परफेक्ट या सोशल-मीडिया-रेडी दिखाने के दबाव से बाहर निकलना चाहिए। किसी के साथ रिश्ता निभाने के लिए बड़ी दावतों की जरूरत नहीं होती; बस साधारण चाय-बिस्कुट या सादे खाने के साथ थोड़ी देर बैठकर बातचीत करना भी रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए काफी है।



















