प्राचीन काल से भारत में धर्म सत्ता को ऊंचा स्थान दिया गया

प्राचीन काल से भारत में धर्म सत्ता को ऊंचा स्थान दिया गय
सिविल लाइन स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय राजयोग केंद्र संचालिका बीके लक्ष्मी बहन के नेतृत्व में माउंट आबू स्थित मुख्यालय में अखिल भारतीय साधु संत महासम्मेलन में कटनी के विलायत कला से वीरेंद्र तिवारी त्यागी महाराज, पुष्पेंद्र महाराज, लक्ष्मी नारायण मंदिर के पंडित निलेश पाठक, विजय शुक्ला ने सहभागिता की । कार्यक्रम आयोजित कराने का उद्देश्य बताते हुए आयोजको के कहा कि प्राचीन काल से भारत में धर्म सत्ता को ऊंचा स्थान दिया गया है धर्म गुरुओं की समाज के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन में अहम भूमिका थी । वे समाज के लिए नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्रोत थे । परंतु समय के परिवर्तन और नैतिक मूल्यों की हास के कारण भारत का पतन हुआ है । आज देश में हिंसा भ्रष्टाचार और अति धर्म ग्लानि के सभी लक्षण प्रत्यक्ष है भारत में पुनः वही अहिंसा परमोधर्म: युक्त राम-राज्य लाने में धर्म नेताओं की मौलिक भूमिका है । किसी भी समाज के उत्थान का आधार है धर्म निष्ठा और आध्यात्मिक सशक्तिकरण आत्मा और परमात्मा की सही पहचान और गुणो एवं आध्यात्मिक शक्तियों से स्वयं को समर्थ बनकर ही काम क्रोध आदि मनोविकारों और उनसे उत्पन्न होने वाली सामाजिक कुरीतियों पर विजय पाई जा सकती है इस सम्मेलन का उद्देश्य परमपिता परमात्मा शिव द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के माध्यम से दिए गए बहुमूल्य गीता ज्ञान रूपी श्रीमद् को संतो विद्वानों एवं विचाराको के द्वारा जनमानस पहुंचना है








