
कटनी: Rail News: ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन का बड़ा आंदोलन, 36 घंटे के भूख हड़ताल के साथ रेल संचालन जारी।
भारतीय रेलवे के लोको रनिंग स्टाफ ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) की केंद्रीय कार्यकारिणी के निर्णय के अनुसार, देशभर के 367 लॉबी पर रनिंग स्टाफ 36 घंटे के हंगर फास्ट (भूख हड़ताल) पर रहकर रेलगाड़ियों का संचालन कर रहे हैं। यह कदम सरकार द्वारा छठवें वेतन आयोग से उत्पन्न विसंगतियों को दूर न करने और माइलेज भत्ते में जनवरी 2024 से नियमानुसार 25% वृद्धि न करने के विरोध में उठाया गया है।
कर्मचारियों का आरोप: सरकार ने अनदेखी की
पटना सेंट्रल बीजीएम की बैठक के बाद, रेलवे मंत्रालय को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि यदि मांगों का समाधान नहीं किया गया तो रनिंग स्टाफ भूख हड़ताल के साथ काम जारी रखेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और समस्या समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
एसोसिएशन का आरोप है कि रेलवे प्रशासन 2 लाख से अधिक लोको रनिंग स्टाफ की जायज मांगों की अनदेखी कर रहा है, जबकि अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों को उनके ग्रेड पे और भत्तों में संशोधन दिया जा रहा है। अब सरकार आंदोलन को नियंत्रित करने की बात कर रही है, लेकिन प्रश्न यह है कि मांगों को समय रहते क्यों नहीं सुलझाया गया?
क्या है कर्मचारियों की मांगें?
रनिंग स्टाफ ने अपनी प्रमुख मांगों को सामने रखते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- माइलेज भत्ता – 24.08.980-8 के अनुसार दरें तय की जाएं और 2024 के संशोधित ट्रैवलिंग अलाउंस के तहत 25% वृद्धि की जाए।
- आयकर में छूट – माइलेज रेट के बढ़ने के साथ ही आयकर छूट की सीमा बढ़ाई जाए।
- साप्ताहिक विश्राम – 30 घंटे का साप्ताहिक विश्राम और अतिरिक्त 6 घंटे विश्राम दिया जाए।
- ड्यूटी घंटे की सीमा – श्रम कानूनों के अनुसार कार्य की अधिकतम सीमा 6 घंटे निर्धारित की जाए।
- रनिंग रूम सुविधा – प्रत्येक चालक के लिए अलग-अलग विश्राम कक्ष उपलब्ध कराया जाए।
- लोको इंजन में सुधार – स्पीड रिपीटर, लुकबैक मिरर, सिग्नल एक्सचेंज लैंप, बेहतर सीटें, और लोको कैब के अंदर आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- रिस्क अलाउंस – लोको रनिंग स्टाफ को जोखिम भत्ता और 075 भत्ता दिया जाए।
आंदोलन का असर और आगे की रणनीति
देशभर में हजारों लोको पायलट और सहायक लोको पायलट इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं। कटनी में 4,482 रनिंग स्टाफ जोनल सेक्रेटरी के नेतृत्व में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे रनिंग रूम और घर पर भोजन ग्रहण नहीं करेंगे, बल्कि अपनी ड्यूटी लॉबी के सामने विश्राम करेंगे और वहीं से अगली ड्यूटी के लिए रवाना होंगे।
अगर सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया, तो मार्च के अंतिम सप्ताह में रेल मंत्री से मिलने और जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए जबलपुर/कटनी से रेलवे कर्मचारियों द्वारा पैदल मार्च किया जाएगा।
न्यायपालिका से अपील
AILRSA ने माननीय उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय से अपील की है कि वे सरकार के एकतरफा पक्ष को सुनकर कोई आदेश जारी न करें, बल्कि पहले यह पूछें कि कर्मचारियों की मांगों पर उचित निर्णय क्यों नहीं लिया गया?
रेल यात्रियों पर असर
इस आंदोलन के कारण रेल परिचालन में देरी और यात्रियों को असुविधा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कर्मचारी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन भूख हड़ताल के कारण उनकी कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया?
रेलवे मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही इस पर कोई कदम उठाएगी।
रेलवे कर्मचारियों की यह ऐतिहासिक भूख हड़ताल आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। अब देखना होगा कि सरकार समाधान निकालती है या आंदोलन और तेज होता है!








