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मूंग की गुणवत्ता पर सवाल, सरकार ने MSP खरीद से बनाई दूरी; अब उड़द पर जोर और 600 रुपये बोनस की घोषणा

मूंग की गुणवत्ता पर सवाल, सरकार ने MSP खरीद से बनाई दूरी; अब उड़द पर जोर और 600 रुपये बोनस की घोषणा, जबलपुर समेत मध्यप्रदेश में मूंग की खेती को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। समर्थन मूल्य (MSP) पर अच्छे दाम मिलने के चलते किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की, लेकिन अधिक मुनाफे की चाह में लगातार कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से फसल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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मूंग की गुणवत्ता पर सवाल, सरकार ने MSP खरीद से बनाई दूरी; अब उड़द पर जोर और 600 रुपये बोनस की घोषणा

जानकारी के अनुसार, 55 से 60 दिन में तैयार होने वाली मूंग में हर सप्ताह कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा था, जिससे उत्पादन तो बढ़ा लेकिन गुणवत्ता गिरकर फसल को कई मामलों में उपभोग के लिए असुरक्षित माना जाने लगा।

इसी के चलते इस बार राज्य सरकार ने मूंग की MSP पर खरीद से दूरी बना ली है और अब उड़द की खरीद को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि उड़द की फसल में कीटनाशकों का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है और इसकी गुणवत्ता बेहतर रहती है।

किसानों को उड़द की खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार ने MSP के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की है। इसके साथ ही कृषि विभाग किसानों को मूंग की जगह उड़द की खेती के लिए जागरूक कर रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मूंग को मूल रूप से खरीफ फसल माना जाता है, लेकिन अधिक लाभ के लिए इसे गर्मी में भी उगाया जा रहा है, जिससे उत्पादन चक्र प्रभावित हुआ है। लगातार कीटनाशक उपयोग के कारण मिट्टी और फसल की गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ा है।

वर्तमान में जबलपुर जिले में मूंग का रकबा लगभग 50 हजार हेक्टेयर है, जबकि उड़द का क्षेत्रफल 40 से 45 हजार हेक्टेयर के बीच है। सरकार का लक्ष्य उड़द के रकबे को बढ़ाकर 60 से 70 हजार हेक्टेयर तक ले जाने का है।

कृषि विभाग का मानना है कि बदलती परिस्थितियों में उड़द की खेती किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन सकती है, जिससे उनकी आय भी स्थिर रह सकेगी।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम