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Police नियम-2025 का हंटर: पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू; दागी बाहर होंगे, छीनेगा कार्यवाहक प्रभार

Police नियम-2025 का हंटर: पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू; दागी बाहर होंगे, छीनेगा कार्यवाहक प्रभार

Police नियम-2025 का हंटर: पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू; दागी बाहर होंगे, छीनेगा कार्यवाहक प्रभार

Police नियम-2025 का हंटर: पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू; दागी बाहर होंगे, छीनेगा कार्यवाहक प्रभार
Police नियम-2025 का हंटर: पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू; दागी बाहर होंगे, छीनेगा कार्यवाहक प्रभार

राज्य सरकार ने प्रदेश के प्रशासनिक अमले में एक बड़ा फेरबदल और शुद्धि अभियान शुरू कर दिया है। पदोन्नति नियम-2025 के तहत 1 जुलाई 2026 से अधिकारी-कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति (Promotion) की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। हालांकि, इस बार सरकार ने पदोन्नति के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

​नए नियमों के अनुसार, पदोन्नति की अंतिम सूची जारी करने से पहले सभी संभावित अधिकारियों और कर्मचारियों के पिछले रिकॉर्ड और पात्रता की कड़ाई से जांच की जा रही है।

​इन तीन पैमानों पर तय होगी पात्रता

​सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पदोन्नति का लाभ केवल बेदाग और स्वच्छ छवि वाले कर्मचारियों को ही मिलेगा। पात्रता की जांच के लिए निम्नलिखित तीन बिंदुओं को प्रमुख आधार बनाया गया है:

  1. वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR): जिन कर्मचारियों की एसीआर में कोई भी प्रतिकूल या नकारात्मक टिप्पणी (Adverse Remark) दर्ज है, वे रेस से बाहर हो जाएंगे।
  2. विभागीय जांच (DE): जो अधिकारी वर्तमान में किसी भी प्रकार की विभागीय जांच के दायरे में हैं, उन्हें अयोग्य माना जाएगा।
  3. लंबित कानूनी मामले: जिनके खिलाफ आपराधिक (Criminal), न्यायालयीन (Court Cases) या लोकायुक्त के मामले लंबित हैं, उन्हें पदोन्नति की पात्रता नहीं होगी।

​छीनेगा ‘कार्यवाहक प्रभार’ (Acting Charge)

​सरकार ने इस बार सबसे सख्त रुख कार्यवाहक प्रभार को लेकर अपनाया है। आदेश में साफ कहा गया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी वर्तमान में उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार (Acting Charge) संभाल रहे हैं, लेकिन नए नियमों के तहत अपात्र (दागी या जांच के दायरे में) पाए जाते हैं, तो उनसे वह उच्च पद का प्रभार तुरंत वापस ले लिया जाएगा। उन्हें वापस उनके मूल पद पर भेज दिया जाएगा।

क्यों दी गई थी अंतरिम व्यवस्था?

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट द्वारा ‘पदोन्नति नियम-2002’ को निरस्त किए जाने के बाद प्रदेश में नियमित पदोन्नतियां पूरी तरह ठप हो गई थीं। इसके बाद, वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने शासकीय कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार सौंपने का निर्णय लिया था। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के आदेश पर विभिन्न विभागों ने यह प्रभार सौंपा था, जो केवल नियमित पदोन्नति शुरू होने तक ही प्रभावी था।

 

​पुलिस विभाग के 15 हजार कर्मचारियों पर सीधा असर

​इस नए नियम और पात्रता की दोबारा समीक्षा का सबसे बड़ा असर पुलिस, राजस्व, सहकारिता, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों पर देखने को मिल रहा है, जहाँ बड़े पैमाने पर कार्यवाहक प्रभार दिए गए थे।

​अकेले पुलिस विभाग में आरक्षक (कांस्टेबल) से लेकर निरीक्षक (इंस्पेक्टर) स्तर के लगभग 15,000 कर्मचारी ऐसे हैं, जो वर्तमान में उच्च पदों का प्रभार संभाल रहे हैं। अब इन सभी के सर्विस रिकॉर्ड और अभिलेखों की दोबारा स्क्रूटनी (जांच) की जा रही है। जो भी मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा, उसे नियमित पदोन्नति से तो हाथ धोना ही पड़ेगा, साथ ही उसका वर्तमान प्रभार भी छीन लिया जाएगा।

​प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी और दागी अधिकारियों पर नकेल कसी जा सकेगी।

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