NCERT और CBSE में भारी स्टाफ कमी पर संसदीय समिति सख्त; NCERT में 56% और CBSE में 44% पद खाली, बोर्ड परीक्षाओं की गुणवत्ता पर संकट का खतरा

NCERT और CBSE में भारी स्टाफ कमी पर संसदीय समिति सख्त; NCERT में 56% और CBSE में 44% पद खाली, बोर्ड परीक्षाओं की गुणवत्ता पर संकट का खतरा

नई दिल्ली: देश में स्कूली शिक्षा की दो सबसे प्रमुख संस्थाओं—राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE)—में कर्मचारियों की भारी कमी को लेकर संसद की अनुमान समिति (2026-27) ने बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है।

संसदीय समिति की 10वीं रिपोर्ट के अनुसार, NCERT में स्वीकृत पदों में से आधे से भी अधिक (56%) पद खाली हैं, जबकि CBSE में 44% पद रिक्त पड़े हैं। समिति ने चेतावनी दी है कि स्थायी कर्मचारियों की इस कमी से राष्ट्रीय स्तर की बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा, गोपनीयता और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ सकता है।

 NCERT: 2,844 में से 1,596 पद पड़े हैं खाली

संसदीय समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) जैसी महत्वपूर्ण नीतियों को आकार देने वाली सर्वोच्च संस्था NCERT में खाली पदों पर तत्काल ध्यान देने की सिफारिश की है:

 CBSE: 44% पद रिक्त, संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता पर उठाए सवाल

संसदीय समिति की समीक्षा में सामने आया कि सीबीएसई भी गंभीर मैनपावर संकट से जूझ रहा है:

 लगातार बढ़ा CBSE का दायरा, छात्र संख्या 40 लाख के पार

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि CBSE का दायरा तेजी से बढ़ा है, लेकिन उस अनुपात में कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई:

  1. संबद्ध स्कूलों में उछाल: 1992-93 में CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या केवल 3,787 थी, जो 2024-25 (अक्टूबर 2025 तक) बढ़कर 31,234 हो चुकी है।

  2. क्षेत्रीय कार्यालय: वर्तमान में 25 क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) और 5 उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से प्रबंधन किया जा रहा है।

  3. छात्रों की संख्या: वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, कक्षा 12वीं में 17 लाख से अधिक और कक्षा 10वीं में 23 लाख से अधिक छात्र (कुल 40 लाख से अधिक) बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं।

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