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तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में साहित्यकार नरेश मेहता के काव्य-जीवन पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन

तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में साहित्यकार नरेश मेहता के काव्य-जीवन पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोज

कटनी- PMCOE शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय कटनी में आज मध्य प्रदेश के मूर्धन्य साहित्यकार नरेश मेहता के काव्य-जीवन पर एक दिवसीय वेबिनार का सफल आयोजन हिंदी विभाग द्वारा किया गया। इस शैक्षणिक वेबिनार में देश के विभिन्न स्थानों से प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

वेबिनार की मुख्य वक्ता डॉ. मधु सिंह, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज, कोलकाता रहीं। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “नरेश मेहता का काव्य भारतीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक संवेदना का सार्थक समन्वय प्रस्तुत करता है। उनके काव्य में परंपरा और आधुनिकता के बीच रचनात्मक संवाद दिखाई देता है, जो उन्हें हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि नरेश मेहता का साहित्य केवल काव्यात्मक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक, दार्शनिक और मानवीय सरोकारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. विजय कुमार ने मुख्य वक्ता का परिचय कराते हुए नरेश मेहता के साहित्यिक अवदान तथा मध्य प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा पर विचार व्यक्त किए। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. माधुरी गर्ग ने विषय-प्रवर्तन करते हुए कहा कि “नरेश मेहता का साहित्य भारतीय जीवन-दृष्टि, मिथकीय चेतना और आधुनिक यथार्थ के बीच सेतु का कार्य करता है। उनके साहित्यिक संसार से जुड़े प्रश्न आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके रचना-काल में थे।
उन्होंने विद्यार्थियों से नरेश मेहता के साहित्य को समकालीन संदर्भों में पढ़ने और समझने का आह्वान किया। वेबिनार में डॉ. आर. पी. सिंह तथा हिंदी विभाग के डॉ. अतुल कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए नरेश मेहता के काव्य और साहित्यिक दृष्टि से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएँ प्रश्नों के माध्यम से प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान मुख्य वक्ता द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. प्रतिमा त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, सभी प्राध्यापकों तथा वेबिनार में सहभागी समस्त विद्यार्थियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों से विद्यार्थियों की साहित्यिक समझ और वैचारिक दृष्टि सुदृढ़ होती है।

यह वेबिनार नरेश मेहता के काव्य-जीवन और साहित्यिक अवदान को समझने की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी प्रयास सिद्ध हुआ।

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