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नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड: 2 दिन पुराना आटा खाने से 45 बच्चे बीमार, कलेक्टर ने स्वसहायता समूह को हटाया

नर्सिंगपुर, मध्य प्रदेश —  मध्य प्रदेश के नर्सिंगपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली एक शासकीय माध्यमिक शाला में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्कूल में भोजन के दौरान खीर-पूरी खाते ही अचानक कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और वे उल्टी करने लगे। इस गंभीर नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड के बाद से शिक्षा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने स्कूल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आइए जानते हैं नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण और विस्तृत जानकारी।

कैसे हुआ नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड?

विद्यालय में मध्याह्न भोजन परोसने की जिम्मेदारी ‘एकता स्वसहायता समूह’ के पास है। शुरुआती जांच और स्थानीय आरोपों के मुताबिक, समूह द्वारा गांव में ही आयोजित एक अन्य कार्यक्रम से बचा हुआ 2 दिन पुराना गूंथा हुआ आटा मंगवाया गया था। इसी पुराने और बासी आटे से बच्चों के लिए पूरियां तैयार कर दी गईं।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रधान पाठक ने बिना एक पल गंवाए तुरंत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को फोन पर सूचना दी। इसके बाद उपलब्ध संसाधनों और एंबुलेंस की मदद से सभी प्रभावित बच्चों को तुरंत जिला चिकित्सालय (जिला अस्पताल) पहुंचाया गया।

कलेक्टर और एसपी ने अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा

नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया। कलेक्टर रजनी सिंह और पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. ऋषिकेश मीना तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे।

सख्त कार्रवाई: एकता स्वसहायता समूह बर्खास्त

बच्चों के स्वास्थ्य के साथ हुए इस खिलवाड़ पर जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर रजनी सिंह ने बड़ा एक्शन लिया है:

निष्कर्ष

नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले मिड-Day मील की निगरानी और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि जिला प्रशासन की मुस्तैदी और समय पर इलाज मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जमीनी स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है।

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