नर्सिंगपुर, मध्य प्रदेश — मध्य प्रदेश के नर्सिंगपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली एक शासकीय माध्यमिक शाला में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्कूल में भोजन के दौरान खीर-पूरी खाते ही अचानक कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और वे उल्टी करने लगे। इस गंभीर नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड के बाद से शिक्षा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने स्कूल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आइए जानते हैं नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण और विस्तृत जानकारी।
कैसे हुआ नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड?
विद्यालय में मध्याह्न भोजन परोसने की जिम्मेदारी ‘एकता स्वसहायता समूह’ के पास है। शुरुआती जांच और स्थानीय आरोपों के मुताबिक, समूह द्वारा गांव में ही आयोजित एक अन्य कार्यक्रम से बचा हुआ 2 दिन पुराना गूंथा हुआ आटा मंगवाया गया था। इसी पुराने और बासी आटे से बच्चों के लिए पूरियां तैयार कर दी गईं।
- समय: दोपहर ठीक 1:30 बजे जैसे ही बच्चों ने भोजन करना शुरू किया, उन्हें खाने का स्वाद बहुत अजीब लगा।
- प्रधान पाठक की तत्परता: बच्चों द्वारा शिकायत किए जाने पर विद्यालय के प्रधान पाठक गणेशदत्त बादल ने तुरंत भोजन को खुद चखा। पूरियों में तेज खटास और अजीब सी दुर्गंध (हीक) आ रही थी।
- बिगड़ती तबीयत: भोजन करने के कुछ ही मिनटों के भीतर बच्चों को पेट में तेज दर्द और उल्टी की शिकायत होने लगी।
- समूह की लापरवाही: जब प्रधान पाठक ने इस घटिया और दूषित भोजन पर कड़ी आपत्ति जताई, तो स्वसहायता समूह के सदस्यों ने अपनी गलती स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रधान पाठक ने बिना एक पल गंवाए तुरंत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को फोन पर सूचना दी। इसके बाद उपलब्ध संसाधनों और एंबुलेंस की मदद से सभी प्रभावित बच्चों को तुरंत जिला चिकित्सालय (जिला अस्पताल) पहुंचाया गया।
कलेक्टर और एसपी ने अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा
नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया। कलेक्टर रजनी सिंह और पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. ऋषिकेश मीना तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे।
- अधिकारियों के निर्देश: कलेक्टर और एसपी ने अस्पताल के वार्डों का जायजा लिया और भर्ती बच्चों से मिलकर उनका हालचाल जाना। साथ ही, उन्होंने ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों को बच्चों के बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए कड़े निर्देश दिए।
- बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति: चिकित्सकों के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सभी प्रभावित बच्चों की स्थिति फिलहाल पूरी तरह सामान्य है और वे खतरे से बाहर हैं।
- अस्पताल में भर्ती बच्चों का आंकड़ा: एहतियात के तौर पर प्राथमिक शाला के 8 और माध्यमिक शाला के 37 बच्चों—यानी कुल 45 बच्चों—को जिला अस्पताल में भर्ती कर कड़ी चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है।
सख्त कार्रवाई: एकता स्वसहायता समूह बर्खास्त
बच्चों के स्वास्थ्य के साथ हुए इस खिलवाड़ पर जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर रजनी सिंह ने बड़ा एक्शन लिया है:
- समूह की तुरंत बर्खास्तगी: दूषित और बासी खाना परोसने वाले ‘एकता स्वसहायता समूह’ को तत्काल प्रभाव से मध्याह्न भोजन के कार्य से हटा दिया गया है।
- विस्तृत जांच के आदेश: कलेक्टर ने इस पूरे मामले की गहराई से उच्च-स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।
- वैधानिक चेतावनी: प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भविष्य में मासूम बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
नर्सिंगपुर मध्याह्न भोजन कांड ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले मिड-Day मील की निगरानी और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि जिला प्रशासन की मुस्तैदी और समय पर इलाज मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जमीनी स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है।











