ईश्वर कृपा कॉम्प्लेक्स मामला: नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार हाईकोर्ट में हुईं पेश, 70 करोड़ से अधिक की देनदारी का मामला सुर्खियों में,2012 के आदेश से जुड़ा है विवाद, ब्याज सहित 70 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की चर्चा; कार्रवाई से पहले निगम ने दोबारा लगवाया तोड़ा गया शट
कटनी। स्टेशन रोड स्थित बहुचर्चित ईश्वर कृपा कॉम्प्लेक्स का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस प्रकरण में नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार को आज हाईकोर्ट के समक्ष पेश होना पड़ा। बताया जाता है कि इससे पहले निगम की ओर से इस मामले में शपथ पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के चलते नगर निगम की कार्यप्रणाली और वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2012 में पारित एक आदेश के तहत नगर निगम को प्रमोटर खुशीराम एंड कंपनी को करीब 22 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज सहित यह राशि अब 70 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की बात सामने आ रही है। इस मामले में प्रमोटर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां से भी उसके पक्ष में निर्णय आने की जानकारी है।
इसके बाद जबलपुर स्थित कमर्शियल कोर्ट ने नगर निगम के विरुद्ध छह कुर्की वारंट जारी किए थे। निगम ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। वहीं, प्रमोटर द्वारा दोबारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए जाने के बाद हाईकोर्ट की कार्यवाही पर स्थगन दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
बताया जाता है कि 22 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने अवमानना प्रकरण के संबंध में नगर निगम से शपथ पत्र मांगा था, जिसे अधिवक्ताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसी सिलसिले में आयुक्त को न्यायालय में पेश होना पड़ा।
शटर तोड़ने के बाद दोबारा लगवाने पर भी उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में नगर निगम की हालिया कार्रवाई भी चर्चा में है। ईश्वर कृपा कॉम्प्लेक्स के जिस शटर को निगम ने कुछ समय पहले जेसीबी से तोड़ दिया था, उसे हाईकोर्ट की कार्यवाही से ठीक पहले निगम ने अपने खर्च पर दोबारा लगवा दिया। इस कदम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि निगम प्रमोटर से चाबी लेकर शटर खुलवा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
वर्षों पुराने इस विवाद में 22 करोड़ रुपये की मूल राशि का ब्याज सहित 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचने का मामला नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें न्यायालय की आगामी कार्यवाही और नगर निगम के जवाब पर टिकी हैं।













