नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास, कुठला थाना अंतर्गत घटित अपराध में विशेष न्यायाधीश ने सुनाई सज
कटनी। नाबालिग बालिका का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही पीड़िता को एक लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को लेख किया गया है।
जिला अभियोजन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुठला थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 570/2023 के प्रकरण में आरोपी संतोष उर्फ कल्लू पिता शिवप्रसाद, उम्र 21 वर्ष, को दोषी पाया गया। माननीय अनन्य विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), कटनी ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3), 376(2)(एन) एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल)/6 के तहत दोषसिद्ध करते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह था पूरा मामला
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता की उम्र घटना के समय 16 वर्ष थी और वह अपने माता-पिता एवं भाई-बहनों के साथ रहती थी। उसके माता-पिता मजदूरी का काम करते थे। दिनांक 30 जून 2023 की रात लगभग 9 बजे जब बालिका घर पर अकेली थी, तभी आरोपी संतोष उर्फ कल्लू उसके घर पहुंचा और उसे अपने साथ ले गया। आरोपी उसे ट्रेन से कटनी से जबलपुर ले गया। इसके बाद दोनों जबलपुर के भारत टॉकीज क्षेत्र में पहुंचे, जहां आरोपी ने बालिका से शादी कर ली। बाद में आरोपी उसे लाल मिट्टी क्षेत्र में स्थित किराए के मकान में ले गया, जहां उसके साथ कई बार गलत काम किया।
घटना के संबंध में बालिका के परिजनों को जानकारी मिलने के बाद कुठला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
अभियोजन के सशक्त तर्कों से हुई दोषसिद्धि
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक/सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री हरिकृष्ण त्रिपाठी द्वारा की गई। विचारण के दौरान अभियोजन ने गवाहों के बयान एवं दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया और उक्त सजा सुनाई।
न्यायालय के इस फैसले से नाबालिग बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कानून की सख्ती और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व का संदेश गया है।















