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अब पूरे प्रदेश में कालोनाइजर के लिए एक ही लाइसेंस, अवैध कॉलोनी बनी तो सीधे कलेक्टर पर होगी कार्रवाई

नए प्रावधान में कॉलोनाइजर पर 1 करोड़ जुर्माना व 10 साल की सजा का प्रस्ताव

भोपाल(YASHBHARAT.COM)। मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। यदि प्रदेश में कहीं भी अवैध कॉलोनी का निर्माण होता है तो सीधे संबंधित जिले के कलेक्टर को जिम्मेदार माना जाएगा और कार्रवाई के लिए वे उत्तरदायी होंगे। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मौजूदा कॉलोनाइजर अधिनियमों को मिलाकर नया एकीकृत अधिनियम बनाया जा रहा है, जिसे 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा।

पूरे प्रदेश में एक ही लाइसेंस से कॉलोनी निर्माण

नए प्रस्तावित कानून के तहत अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। एक ही लाइसेंस से कॉलोनाइजर पूरे प्रदेश में कहीं भी कॉलोनी विकसित कर सकेगा।
कलेक्टर को सक्षम प्राधिकारी बनाया जाएगा। वे चाहें तो अनुविभागीय अधिकारियों को अधिकार सौंप सकेंगे लेकिन अंतिम जिम्मेदारी कलेक्टर की ही होगी।

अवैध कॉलोनाइजर पर सख्त दंड

नए अधिनियम में अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर कड़ी सजा का प्रावधान किया जा रहा है। नए प्रावधान में अर्थदंड 10 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है जबकि 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान भी रखा गया है। वहीं सरकार को अवैध कॉलोनी की भूमि जब्त करने का अधिकार भी रहेगा।

ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था होगी लागू

शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई अवैध निर्माण से जुड़ी शिकायतों को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में लाने की तैयारी है।
शिकायत पर 45 दिनों में निराकरण अनिवार्य
बिल्डर को 15 दिन का नोटिस समयसीमा पूरी होने पर सरकार स्वयं कार्रवाई करेगी।

हजारों अवैध कॉलोनियां चिंता का कारण

नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में करीब चार हजार कॉलोनियां अवैध की श्रेणी में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह सरपंच की अनुमति से कॉलोनियां बना दी जाती हैं और बाद में जब ये क्षेत्र नगरीय सीमा में आते हैं, तो बुनियादी सुविधाओं की कमी से समस्या खड़ी हो जाती है।
अवैध कॉलोनियों में न तो सड़क, सीवरेज, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं होती हैं और न ही कॉलोनी का विधिवत हस्तांतरण, जिससे रहवासियों को परेशानी झेलनी पड़ती है और सरकार पर दबाव बनता है।

नए कानून में स्थायी समाधान की कोशिश

सरकार का मानना है कि नगरीय और ग्रामीण विकास से जुड़े अधिनियमों को एकीकृत करने से व्यवस्था पारदर्शी होगी, जवाबदेही तय होगी और अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों विभागों के अधिकारी शामिल रहेंगे। नए अधिनियम से कॉलोनी विकास को व्यवस्थित करने और अवैध निर्माण पर कठोर नियंत्रण की दिशा में सरकार का यह अब तक का सबसे सख्त कदम माना जा रहा है।

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