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अब नहीं आऊंगा…”: काम छूटा, उम्मीद टूटी-सूरत से लौटते मजदूरों की मार्मिक कहानी

सूरत। अब नहीं आऊंगा…”: काम छूटा, उम्मीद टूटी-सूरत से लौटते मजदूरों की मार्मिक कहानी।मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है। सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री इन दिनों भारी संकट से गुजर रही है, जहां एलपीजी गैस की कमी के कारण उत्पादन घट गया है और लाखों मजदूरों को शहर छोड़ना पड़ रहा है।

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अब नहीं आऊंगा…”: काम छूटा, उम्मीद टूटी-सूरत से लौटते मजदूरों की मार्मिक कहानी

भावुक वीडियो ने दिखाई हकीकत

उधना रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो में एक युवक की बेबसी साफ नजर आती है। हाथ में बैग लिए वह अपने घर लौटते वक्त कहता है—
“अब नहीं आऊंगा… दोस्त बोल देना, अब नहीं आऊंगा…”
यह वीडियो सूरत में बढ़ते मजदूर पलायन की दर्दनाक तस्वीर बयां कर रहा है।

3 लाख मजदूर छोड़ चुके हैं शहर

गैस की कमी का सीधा असर इंडस्ट्री पर पड़ा है।

  • अब तक करीब 30% मजदूर (लगभग 3 लाख) सूरत छोड़ चुके हैं
  • उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है

उत्पादन पर पड़ा असर

पहले जहां टेक्सटाइल उत्पादन रोजाना 6.5 करोड़ मीटर था, अब घटकर 4.5 करोड़ मीटर रह गया है।

  • रोजाना लगभग 15 हजार गैस सिलेंडर की जरूरत
  • सप्लाई कम होने से संकट और गहराया

रेलवे स्टेशनों पर बढ़ी भीड़

उधना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
एलपीजी संकट के साथ छुट्टियों का सीजन भी पलायन को तेज कर रहा है, जिससे रेलवे व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

क्यों बढ़ा संकट?

मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर सीधे तौर पर इंडस्ट्री पर पड़ा है। खासतौर पर सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जो गैस पर काफी हद तक निर्भर है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।सूरत का यह संकट सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और मजदूरों की जिंदगी से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अब नहीं आऊंगा…”: काम छूटा, उम्मीद टूटी—सूरत से लौटते मजदूरों की मार्मिक कहानी

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम