NIA का बड़ा प्रहार: कश्मीर में लश्कर के 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश

NIA का बड़ा प्रहार: कश्मीर में लश्कर के 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश

यश भारत  डेस्क (श्रीनगर)। कश्मीर घाटी से आतंकवाद के बचे-खुचे तंत्र को उखाड़ फेंकने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को एक साथ कई जिलों में बड़ी कार्रवाई की। आतंकवाद-विरोधी जांच को तेज करते हुए NIA की टीमों ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों की मदद से दक्षिण और उत्तर कश्मीर के 7 रिहायशी ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ी सीमा-पार आतंकी साजिश और उनके स्थानीय ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ (OGW) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से की गई है।

3 जिलों के 7 ठिकानों पर दबिश आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाबलों के कड़े पहरे के बीच NIA की अलग-अलग टीमों ने तड़के छापेमारी शुरू की:

नाका चेकिंग से खुला था राज इस बड़ी कार्रवाई की नींव 31 मार्च 2026 को पड़ी थी। श्रीनगर के जकूरा इलाके में देर रात नाका चेकिंग के दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक मोटरसाइकिल सवार संदिग्ध को दबोचा था। आरोपी की तलाशी लेने पर उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। पूछताछ में आरोपी की पहचान लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय OGW के रूप में हुई थी।

मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े होने के कारण जकूरा थाने की एफआईआर (संख्या 24/2026) को NIA ने अपने हाथ में लेते हुए केस नंबर RC-02/2026/NIA/JMU के तहत नए सिरे से जांच शुरू की थी।

पाकिस्तान में बैठे आका दे रहे थे निर्देश NIA की अब तक की जांच में एक बेहद खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर स्थानीय मददगारों (OGWs) के जरिए घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को रसद, हथियार, पनाह (ठिकाना), रेकी और संचार नेटवर्क में सीधी मदद पहुंचा रहे थे। इस केस में शामिल कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को सुरक्षा एजेंसियां पहले ही गिरफ्तार कर चुकी हैं।

UAPA और शस्त्र अधिनियम के तहत कस रहा शिकंजा मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 23, शस्त्र अधिनियम की धारा 7 व 25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 जैसी कठोर कानूनी धाराएं लगाई गई हैं। NIA अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों के लोकल सपोर्ट सिस्टम को जड़ से खत्म करने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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