National Education Policy: नई शिक्षा नीति के तहत कॉलेज के छात्र पढ़ेंगे राम चरित मानस  प्रदेशभर के कालेजों में नए सत्र से स्नातक (यूजी) तृतीय वर्ष में हिंदी साहित्य और दर्शनशास्त्र के विद्यार्थी श्रीरामचरित मानस का दार्शनिक चिंतन व आधुनिक भारतीय महान विभूतियों का जीवन दर्शन पढ़ सकेंगे।

इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में बदलाव किया गया है। पाठ्यक्रमों को सामान्य वैकल्पिक विषयों के कला संकाय में जोड़ा गया है। पाठ्यक्रम तैयार कर लिए गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर इन्हें अपलोड भी कर दिया गया है।

दर्शनशास्त्र में विद्यार्थी को कठोपनिषद में यम नचिकेता संवाद, मनुस्मृति में मानव धर्म, भागवतपुराण में न्याय एवं परहित की भावना, रामायण में श्रीराम भरत संवाद एवं महाभारत में मोक्ष धर्म प्रकरण, श्रीमद् भगवतगीता का आध्यात्मिक मानवतावाद, जैन एवं बौद्ध दर्शन पढ़ने को मिलेगा। वहीं हिंदी साहित्य में रामचरित मानस को शामिल किया गया है। इसमें जीवन मूल्य, संवेदना, सामाजिक दृष्टिकोण, लोक व नगरीय संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा।

 

इसके अलावा आधुनिक भारतीय महान विभूतियों में राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती, आर्य समाज की स्थापना, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, पंडित मदन मोहन मालवीय, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, पूर्व राष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन, डा. भीमराव आंबेडकर सहित अन्य विभूतियों के व्यक्तित्व व कृतित्व को पढ़ने का मौका मिलेगा।