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गोवर्धन पर्वत घटने का रहस्य: ऋषि पुलस्त्य के श्राप से जुड़ी पौराणिक कथा

गोवर्धन पर्वत घटने का रहस्य: ऋषि पुलस्त्य के श्राप से जुड़ी पौराणिक कथा, सनातन धर्म में गोवर्धन पर्वत का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। भक्त इसे गिरिराज जी के नाम से भी जानते हैं और मान्यता है कि इसकी परिक्रमा करने से हर मनोरथ पूर्ण होता है। सोशल मीडिया और कई चर्चाओं में एक पौराणिक कथा तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें बताया जा रहा है कि गोवर्धन पर्वत का आकार समय के साथ कम हो रहा है और इसके पीछे एक ऋषि के श्राप की वजह है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, ऋषि पुलस्त्य जब गोवर्धन पर्वत को काशी ले जाना चाहते थे, तो पर्वत ने शर्त रख दी कि जहाँ भी उसे रखा जाएगा, वह वहीं स्थापित रहेगा। ब्रज भूमि पर पहुँचने पर पर्वत ने श्रीकृष्ण की भक्ति और लीलाओं का अनुभव करने की इच्छा की वजह से अपना भार बढ़ा लिया।

जब ऋषि पुलस्त्य ने उसे फिर से उठाने की कोशिश की, तो पर्वत नहीं हिला। गुस्साए ऋषि ने गोवर्धन पर्वत को श्राप दिया कि वह धीरे‑धीरे घटेगा और एक दिन पृथ्वी में विलीन हो जाएगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पर्वतों का आकार बदलना भू‑वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से होता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसे ऋषि के श्राप से जोड़कर देखा जाता है।

ये कथा न केवल भक्तों में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी इसका वर्णन किया जाता है, जिससे लोग अपनी परंपरा और विश्वास से जुड़े रह सकें। गोवर्धन पर्वत का आकार घटने का पौराणिक रहस्य: ऋषि पुलस्त्य के श्राप से जुड़ी कथा वायरल

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम