MP में कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला टला, ये है कारण

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष का फैसला फिलहाल टल गया है जिसके पीछे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की हरियाणा और झारखंड के विधानसभा की चुनाव समितियों के गठन की व्यस्तता बताई जा रही है।
हालांकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली से लौटने के बाद मीडिया से यह कहा है कि जल्द ही नए पीसीसी प्रमुख का फैसला हो जाएगा। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष पद पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की नियुक्ति के पक्ष में उनके समर्थक बयानबाजी और प्रदर्शन आदि कर रहे हैं।
कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर पिछले महीने तेज हुई सरगर्मी अचानक थम गई है। सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद नए कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर प्रदेश के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने भोपाल में रायशुमारी की थी और दिल्ली में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सोनिया गांधी से मुलाकात भी हुई। बाबरिया ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी और अगस्त में ही फैसले की संभावना जताई थी।
मगर तेजी से घटनाक्रम बदला और इसी बीच सिंधिया को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन की स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बना दिया गया। इससे मप्र में उनके समर्थक कांग्रेस नेताओं की नाराजगी भी सामने आई। उनके समर्थक मंत्रियों प्रद्युम्न सिंह तोमर हो या इमरती देवी या विधायक व ग्वालियर-चंबल के स्थानीय कांग्रेस कमेटियों के पदाधिकारी, सभी ने सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने की मांग को उठाया।
कुछ नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा भी दिया तो कुछ सड़कों पर उतर आए। इधर, सिंधिया मंगलवार से दो दिन के प्रवास पर ग्वालियर पहुंच रहे हैं। उनके व्यस्त कार्यक्रम के दौरान पीसीसी प्रमुख बनाए जाने की मांग करने वाले उनके समर्थक एक बार फिर उनके सामने आवाज उठाएंगे।
मुख्यमंत्री कमलनाथ दो दिन के दिल्ली प्रवास से सोमवार की दोपहर भोपाल लौट आए। उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा में कहा कि पीसीसी का फैसला जल्द होगा। वहीं, कमलनाथ सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सिंधिया के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग पर कहा है कि वे वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें हाईकमान ने महाराष्ट्र विस चुनाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। उनके अधीन मल्लिकार्जुन खड़गे रहेंगे। उनके लिए प्रदेश अध्यक्ष का कद छोटा है।








