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मध्य-पूर्व एशिया युद्ध से दवा उद्योग हिला, अस्पतालों तक सप्लाई पर खतरा

मध्य-पूर्व एशिया युद्ध से दवा उद्योग हिला, अस्पतालों तक सप्लाई पर खतरा

भोपाल।मध्य-पूर्व एशिया युद्ध से दवा उद्योग हिला, अस्पतालों तक सप्लाई पर खतरामध्य-पूर्व एशिया में जारी युद्ध का असर अब दवा उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों को दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

सबसे ज्यादा दबाव एमएसएमई श्रेणी के दवा निर्माताओं पर है, जो सरकारी अस्पतालों को बड़ी मात्रा में जेनरिक दवाएं सप्लाई करते हैं। कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं के कारण इन उद्योगों के लिए लागत संतुलित करना मुश्किल होता जा रहा है।

एमपी स्माल एंड मीडियम ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ने इस गंभीर स्थिति को लेकर सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल राहत की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो अगले दो-तीन महीनों में बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयों के बंद होने का खतरा है।

दवा उद्योगों ने सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं, जिनमें—

  • सरकारी टेंडरों की मियाद बढ़ाना
  • बढ़ती लागत के अनुसार राहत पैकेज देना
  • जीवन रक्षक दवाओं के लिए नए दामों पर शॉर्ट टेंडर जारी करना शामिल है

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों को मिलने वाली करीब 90 प्रतिशत जेनरिक दवाओं की आपूर्ति इन्हीं छोटे और मध्यम उद्योगों से होती है। ऐसे में यदि ये इकाइयां प्रभावित होती हैं, तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।

कुल मिलाकर, युद्ध का असर अब सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दवा जैसे संवेदनशील सेक्टर में भी संकट गहराने लगा है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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