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Katni: रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड बढ़ी इंजेक्शन के लिए भटक रहे मरीजों के परिजन

Katniकटनी। लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण और जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने के बाद अब रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मरीजों के परिजन परेशान देखे जा रहे हैं।

50 से ज्यादा मरीजों को आवश्यकता, मांग के हिसाब से नहीं हो रही आपूर्ति

जानकारी के मुताबिक वर्तमान में करीब आधा सैकड़ा से अधिक मरीज ऐसे हैं, जिन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत है लेकिन इसकी तुलना में सप्लाई कम ही हो रही है।

शहर में कोविड-19 मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा होने के बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए शहर के लोग मनमाना दाम तक देने के लिए तैयार हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें इंजेक्शन नहीं मिल रहा है।

हालांकि रेमडेसिविर इंजेक्शन सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में किस मरीज को लगना है, इसका निर्णय सिविल सर्जन की अध्यक्षता में गठित कमेटी कर रही है।

मरीज व परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन के लिए एनओसी देने में भेदभाव हो रहा है। इस बीच जिला अस्पताल में सरकारी सप्लाई में 60 इंजेक्शन की आपूर्ति हुई।

दो दिन बाद बुधवार को प्राइवेट स्टॉकिस्ट के पास 60 इंजेक्शन की सप्लाई हुई। ड्रग इंस्पेक्टर स्वप्निल सिंह के मुताबिक गुरूवार को 60 से 80 और शुक्रवार को भी इतने ही इंजेक्शन की सप्लाई होने की उम्मींद है।

5 कंपनियों के इंजेक्शन कटनी में हो जाएंगे उपलब्ध 
कटनी में रेमडेसिविर  इंजेक्शन की मांग बढ़ती जा रही है। दवा व्यवसाय से जुड़ी कंपनियों ने इंजेक्शन के लिए कटनी में अपने.अपने रेट खोल दिए हैं और कटनी मे यह इंजेक्शन 8 से 10 दिनों के भीतर 4 से 5 कंपनियों के उपलब्ध हो जाएंगे।

इन कंपनियों के रेट 700 रूपए से लेकर 4000 तक हैं। दवा कारोबार से जुड़ी कंपनियों ने कटनी के लिए अपने कोड खोल दिए हैं, हालांकि अभी एक ही जगह रामसंस मेडिकल ब्रिज के नीचे से मिलेंगे लेकिन दवा व्यवसाय से जुड़े लोग बता रहे हैं कि प्रशासन चाहेगा तो कुछ अन्य मेडिकल में भी इंजेक्शन उपलब्ध करवा सकता है।

दवा कंपनियों ने कटनी के लिए जो कोड  खोले हैं, उसमें किसी जनप्रतिनिधि या सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। यह दवा कारोबार और विक्रेताओं के बीच एक व्यवसाय है, हालांकि 8 से 10 दिनों के भीतर जो चार पांच कंपनियों का इंजेक्शन कटनी में उपलब्ध हो रहे हैं, उनके रेट 700 रूपए से शुरू होंगे।

शासन द्वारा बनाई गई 3 डाक्टरों की कमेटी तय करेगी कि किस मरीज को प्राथमिकता के आधार पर कितने इंजेक्शन चाहिए। एक मरीज को 6 इंजेक्शन लगने हैं, तो एक साथ नहीं मिलेंगे। 2-2 कर कर उपलब्ध कराए जाएंगे।

हालांकि जानकारों का कहना है कि इंजेक्शन के लिए कोई कमेटी का निर्धारण न हो और मरीज चाहे तो घर पर भी इंजेक्शन लगवा सके ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए।

इनका कहना है
रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए एनओसी देने में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। बुधवार को जिला अस्पताल में ऑक्सीजन कम पडऩे के बाद दूसरे वार्ड से सिलेंडर मंगवानी पड़ी। जिस फर्म को ठेका दिया गया है, उसके द्वारा ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन मरीजों की संख्या बढऩे के साथ ही और ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी।
डॉ यशवंत वर्मा, सिविल सर्जन

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम