Jal Ganga Campaign: कटनी के पथरहटा गांव में दीवारों ने बोलना शुरू किया- ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत ग्रामीणों ने लिया पानी बचाने का अनोखा संकल्प
Jal Ganga Campaign: कटनी के पथरहटा गांव में दीवारों ने बोलना शुरू किया- 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत ग्रामीणों ने लिया पानी बचाने का अनोखा संकल्प

कटनी/विजयराघवगढ़: जल संकट के इस दौर में भावी पीढ़ी के लिए पानी की एक-एक बूंद को सहेजना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी उद्देश्य को लेकर कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पथरहटा में एक अनूठी और प्रभावी पहल देखने को मिली है। यहाँ ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत पारंपरिक और आकर्षक दीवार लेखन (Wall Writing) के जरिए पूरे गांव को जल संरक्षण का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण न केवल पानी का अपव्यय रोकने के प्रति सचेत हो रहे हैं, बल्कि अपने पारंपरिक जल स्रोतों (कुएं, बावड़ी, तालाब) के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए भी आगे आ रहे हैं।
Jal Ganga Campaign: कटनी के पथरहटा गांव में दीवारों ने बोलना शुरू किया- ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत ग्रामीणों ने लिया पानी बचाने का अनोखा संकल्प
“दादा-दादी करें गुहार, पानी बचाओ अबकी बार”– नारों से गूंजी गांव की दीवारें
ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों ने गांव के मुख्य चौराहों, पंचायत भवन, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों की दीवारों को अपनी रचनात्मकता से बदल दिया है:
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भावनाओं को छूते संदेश: दीवारों पर “जल है तो कल है”, “जल जीवन का अनमोल रतन, इसे बचाने का सब करो जतन” और “दादा-दादी करें गुहार, पानी बचाओ अबकी बार” जैसे सीधे और मर्मस्पर्शी नारे लिखे गए हैं, जो हर आते-जाते ग्रामीण का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
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रामायण की चौपाई से परोपकार का पाठ: ग्रामीणों को जल स्रोतों को साफ रखने और उन्हें दूषित न करने की प्रेरणा देने के लिए गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रसिद्ध चौपाई—“परहित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई” भी दीवारों पर उकेरी गई है। इसके जरिए लोगों को समझाया जा रहा है कि जलस्रोतों को स्वच्छ रखना भी सबसे बड़ा पुण्य और परोपकार है।
ग्रामीणों ने लिया ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ अपनाने का संकल्प
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का जमीन पर गहरा और सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है:
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दैनिक जीवन में बदलाव: इन नारों और संदेशों को पढ़कर ग्रामीणों में पानी की बर्बादी रोकने को लेकर एक नई चेतना जागी है।
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वर्षा जल संचयन: गांव के प्रबुद्ध जनों और युवाओं ने इस मानसून सीजन में अपने घरों और सार्वजनिक भवनों में वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया है, ताकि भूजल स्तर (Groundwater Level) को वापस सुधारा जा सके।








