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Jabalpur में अधिकारी की कोरोना से मृत्यु नहीं यह आपदा के वक्त मानवीयता की मौत है

आशीष शुक्ला..✒

राजपत्रित अधिकारी आर सी कुरील की कतिथ तौर पर कोरोना से मृत्यु, दिवंगत की पत्नी ने लगाए निजी अस्पताल पर लापरवाही के गम्भीर आरोप, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

जबलपुर। कोविड19 कतिपय अस्पतालों के लिए ऐसा आपदा में अवसर बन कर आया कि मरीजों के परिजन धन धर्म दोनों गंवा रहे हैं।

जबलपुर में उद्योग विभाग के संयुक्त संचालक के साथ कोविड पॉजिटीव होने के बाद जो कुछ हुआ उसे सुनकर कोई भी परेशान हो सकता है।

सवाल यह कि जब एक राजपत्रित अधिकारी के उपचार में इस तरह की घोर लापरवाही तथा अस्पताल प्रशासन द्वारा अमानवीय व्यवहार किया जा सकता है तो जबलपुर में आम आदमी का तो भगवान ही मालिक है।

दरअसल आज संयुक्त संचालक आर सी कुरील उद्योग कार्यलय का मेडिकल में इलाज के दौरान निधन हो गया।

वैसे तो यह एक सामान्य सी खबर हो सकती है लेकिन इस मृत्यु के पीछे की जो कहानी सामने आई वह व्यवस्था पर काला धब्बा है।

दरअसल श्री कुरील को 11 तारीख को शेल्बी बीमारी के कारन सेल्वी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां पहले तो तीन चार दिन इलाज किया गया। बिना यह बताए कि श्री कुरील कोरोना पॉजिटिव हैं भी या नहीं।

अचानक उन्हें आइसीयू से प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। यहां शिफ्ट होते ही उनकी तबियत बिगड़ी तो परिजनों से उन्हें मेट्रो अस्पताल में शिफ्ट करने की बात कही गई, लेकिन यहां से डिसचार्ज होने में 5 लाख रुपये से अधिक का बिल थमा दिया गया। बताया जाता हैं कि उन्हें कोविट के कारण भर्ती नही कराया गया था,अन्य बीमारी के कारण भर्ती कराया था ।

बात यहीं खत्म नहीं हुई जब तक अस्पताल को 3 लाख का भुगतान नहीं किया गया तब तक करीब एक घण्टे तक मरीज एम्बुलेंस में ही रखे गए। यहां से उन्हें मेडिकल कालेज ले जाया गया जहां आज श्री कुरील ने दम तोड़ दिया। साथ ही दम तोड़ गईं जबलपुर की संवेदना, मानवीयता तथा सरकारी तंत्र की इस आपदा काल मे व्यवस्थाएं।

यह सभी आरोप दिवंगत श्री कुरील की पत्नी ने लिखित तौर पर लगाते हुए इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है।

श्री कुरील की गुहार पर आये प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं तीन सदस्यीय जांच समिति इसकी जांच करेगी जिसमे अपर कलेक्टर हर्ष दीक्षित सीएमओ रतनेश कुररिया तथा मेडिकल के कोविड इंचार्ज शामिल हैं।

जांच में किसकी लापरवाही सामने आती है यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है किंतु एक राजपत्रित अधिकारी के बीमार होने और उनके परिजनों के साथ हुए बर्ताव के बारे में जो दिवंगत की पत्नी ने लिखा है वह स्तब्ध कर देने वाला है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम