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अमेरिका में चर्चों पर बढ़ते हमले: धार्मिक समुदाय की सुरक्षा को खतरा

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अमेरिका में चर्चों पर बढ़ते हमले: धार्मिक समुदाय की सुरक्षा को खतरा। Pew research center की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका एक ईसाई बहुल देश है. देश में 62% ईसाई रहते हैं. वहीं, 2% यहूदी, 1% मुसलमान, 1% बौद्ध, 1% हिंदू हैं. वहीं, 29 प्रतिशत धार्मिक रूप से असंबद्ध Religiously unaffiliated हैं. वहीं, दूसरी तरफ फैमिली रिसर्च काउंसिल (FRC) चर्चों के खिलाफ दुश्मनी रिपोर्ट सीरीज के तहत 2018 से अमेरिका के सभी संप्रदायों के चर्चों पर हमलों को ट्रैक कर रही है. अब तक ऐसे हमलों की कुल संख्या 1,384 तक पहुंच गई है.

 

चर्च पर बढ़ रहे हैं हमले
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल ज्यादातर मामलों में चर्च में तोड़फोड़ (वैंडलिज्म) दर्ज की गई. जिनकी संख्या 284 दर्ज की गई. रिपोर्ट में 55 आगजनी, 14 बम धमकी और 28 बंदूक से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए. जो 2023 की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है. इसके अलावा 47 घटनाओं को अन्य कैटेगरी में रखा गया. राज्यों में कैलिफोर्निया 2024 में 40 घटनाओं के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद पेंसिल्वेनिया (29), फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क (25-25), टेक्सास (23), और टेनेसी और ओहायो (19-19) रहे.

एफआरसी (FRC) के अध्यक्ष टोनी पर्किन्स ने चर्च पर हो रहे हमलों को आस्था के प्रति गहरी सांस्कृतिक दुश्मनी का संकेत बताया. उन्होंने कहा, यह रिपोर्ट साफ तौर पर दिखाती है कि धार्मिक स्वतंत्रता आज अमेरिका में गंभीर खतरों का सामना कर रही है.

कहां हुए सबसे ज्यादा हमले?

कैथोलिकवोट (CatholicVote) ने मई 2020 से अब तक कम से कम 518 कैथोलिक चर्चों पर हमलों का रिकॉर्ड रखा है. कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया और टेक्सास जैसे राज्यों में कैथोलिक चर्चों पर सबसे ज्यादा हमले हुए हैं.

कैथोलिकवोट का कहना है कि इन मामलों में सिर्फ लगभग 30% में ही गिरफ्तारी हुई है. एफआरसी के “सेंटर फॉर रिलिजियस लिबर्टी” की डायरेक्टर एरियल डेल टुरको ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता सिर्फ कानूनी सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहमति पर भी निर्भर करती है. उन्होंने कहा, चर्चों के खिलाफ तोड़फोड़ या अन्य अपराध का कोई भी उदाहरण स्वीकार्य नहीं है. हमें धार्मिक स्वतंत्रता और अपनी ईसाई विरासत के सम्मान के लिए सांस्कृतिक समर्थन को मजबूत करना होगा.

कौन है मिशिगन चर्च का आरोपी

मिशिगन के चर्च में हुई गोलीबारी के आरोपी थॉमस सैनफोर्ड पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया. साथ ही अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पुलिस ने थोड़ी देर पीछा करने के बाद आरोपी को गोली मार दी. पुलिस प्रमुख विलियम रेने ने बताया कि जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि सैनफोर्ड ने जानबूझकर इमारत में आग लगाई.

आरोपी थॉमस सैनफोर्ड 40 साल का था. वो बर्टन शहर का रहने वाला था. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, थॉमस सैनफोर्ड युद्ध का पूर्व सैनिक था. सैनफोर्ड ने साल 2004 से 2008 तक इराक में सेवा की थी. अमेरिका में हाल ही में हुए चर्च पर हमले की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी निंदा की है. ट्रंप ने कहा, यह अमेरिका में ईसाइयों पर एक और टारगेटिड हमले जैसा है. साथ ही उन्होंने कहा, हमारे देश में हिंसा की यह महामारी तुरंत खत्म होनी चाहिए!

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