कैमरों की जासूसी से बढ़ा खतरा: ईरान के निगरानी सिस्टम को हैक कर इजराइल ने बनाई बढ़त
कैमरों की जासूसी से बढ़ा खतरा: ईरान के निगरानी सिस्टम को हैक कर इजराइल ने बनाई बढ़त
कैमरों की जासूसी से बढ़ा खतरा: ईरान के निगरानी सिस्टम को हैक कर इजराइल ने बनाई बढ़त
कैमरों की जासूसी से बढ़ा खतरा: ईरान के निगरानी सिस्टम को हैक कर इजराइल ने बनाई बढ़त, ईरान में लगे निगरानी कैमरे अब उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बनते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल ने इन कैमरों को हैक कर संवेदनशील जानकारियां हासिल कीं, जिनमें अली खामेनेई की लोकेशन ट्रैक करना भी शामिल बताया जा रहा है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक दौर में कैमरे और डिजिटल निगरानी सिस्टम भी युद्ध के अहम हथियार बन चुके हैं।
कैमरों की जासूसी से बढ़ा खतरा: ईरान के निगरानी सिस्टम को हैक कर इजराइल ने बनाई बढ़त
बताया जा रहा है कि तेहरान में लगे इंटरनेट से जुड़े कैमरों की मदद से लोगों की गतिविधियों, आने-जाने के रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए इन फुटेज का तेजी से विश्लेषण कर खास व्यक्तियों की पहचान और मूवमेंट ट्रैक करना आसान हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर पासवर्ड, पुराने सॉफ्टवेयर और पायरेटेड सिस्टम के इस्तेमाल ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण उसे आधुनिक और सुरक्षित तकनीक तक सीमित पहुंच मिल पाती है, जिससे वह अक्सर पुराने या कम सुरक्षित उपकरणों पर निर्भर रहता है।
पिछले कुछ वर्षों में तेहरान के कैमरों के हैक होने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 2022 में हजारों कैमरों का डेटा लीक हुआ था, जबकि साइबर विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि दुनिया भर में लाखों कैमरे अब भी बिना पर्याप्त सुरक्षा के चल रहे हैं।
यह घटनाक्रम बताता है कि अब युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा और तकनीक के जरिए भी लड़ा जा रहा है। ऐसे में हर देश के लिए अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो गया है।