रुपया रिकॉर्ड लो पर: एक्सपोर्टर्स के लिए ‘कड़वी-मीठी’ स्थिति, इन सेक्टर्स को मिल सकता है फायदा

रुपया रिकॉर्ड लो पर: एक्सपोर्टर्स के लिए ‘कड़वी-मीठी’ स्थिति, इन सेक्टर्स को मिल सकता है फायदा

रुपया रिकॉर्ड लो पर: एक्सपोर्टर्स के लिए ‘कड़वी-मीठी’ स्थिति, इन सेक्टर्स को मिल सकता है फायदा, भारत में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर (93.86) पर पहुंच गया है। इसका असर दो तरह का देखने को मिल रहा है—जहां एक ओर निर्यातकों (Exporters) को कुछ फायदा मिल सकता है, वहीं बढ़ती लागत इस लाभ को सीमित कर रही है।

 किन सेक्टर्स को होगा फायदा?

कमजोर रुपये से भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते हो जाते हैं, जिससे इन सेक्टर्स को फायदा मिल सकता है:

कपड़ा (Textile)
चमड़ा (Leather)
कृषि उत्पाद
कालीन और हस्तशिल्प
कुछ इंजीनियरिंग सामान

Federation of Indian Export Organisations के अनुसार, इससे खासकर प्राइस-सेंसिटिव मार्केट्स में भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।

 लेकिन नुकसान भी कम नहीं

दूसरी ओर, जिन उद्योगों की निर्भरता इंपोर्टेड कच्चे माल पर है, उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है:

इलेक्ट्रॉनिक्स
पेट्रोलियम
रत्न और आभूषण
केमिकल्स

कमजोर रुपये के कारण कच्चा माल, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है, जिससे मुनाफा घट सकता है।

 निर्यात पर क्या असर?

Engineering Export Promotion Council के मुताबिक, मार्च में भारत के निर्यात में साल-दर-साल लगभग 20% तक गिरावट आ सकती है, खासकर मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण।

 बढ़ती इनपुट कॉस्ट

उद्योग के अनुसार:

कच्चे माल और ऊर्जा की लागत में 10% से 50% तक बढ़ोतरी
डीजल, बिजली और केमिकल्स महंगे
छोटे एक्सपोर्टर्स पर ज्यादा दबाव

 कुल मिलाकर क्या स्थिति?

रुपये की गिरावट से मिलने वाला फायदा:

सीमित और अल्पकालिक
सिर्फ कुछ सेक्टर्स तक सीमित

जबकि नुकसान:

इंपोर्ट कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी
मार्जिन पर दबाव

 

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