Income tax raids in Madhya Pradesh: सीबीडीटी की रिपोर्ट पर पुलिस अधिकारियों का पलटवार
Income tax raids in Madhya Pradesh: भोपाल। मध्य प्रदेश में कमल नाथ सरकार के दौरान पड़े आयकर विभाग के छापों के दौरान बरामद दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा किया गया है।
जिन चार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही गई है, उन्होंने अपर मुख्य सचिव (गृह) के समक्ष पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा है। इसमें कानूनी प्रविधानों का उल्लेख करते हुए आयकर विभाग की रिपोर्ट को ही अभी तक अधूरा बताया है। असेसमेंट अधिकारी के पास ही रिपोर्ट नहीं जाने को बड़ा मुद्दा बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का भी हवाला दिया गया है।
गौरतलब है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी थी। चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और मुख्य सचिव को रिपोर्ट भेजकर चार पुलिस अधिकारियों (तीन आइपीएस सुशोवन बनर्जी, संजय माने और वी. मधु कुमार और एक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण मिश्रा) के खिलाफ ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज कराने को कहा था। मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इसमें किसी को नामजद नहीं किया गया है।
उधर, आरोपों की जद में आए अधिकारियों ने लंबी तैयारी के बाद पलटवार किया है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने विभाग के समक्ष अपने वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखा है। इसमें आयकर विभाग की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं। विभाग से कहा गया है कि आयकर विभाग की ओर से अप्रेजल के बाद असेसमेंट अधिकारी का काम होता है कि वह सभी पक्षों को बुलाकर उनका पक्ष जाने। इसके बाद टैक्स की गणना करे।
अभी तक असेसमेंट अधिकारी के पास रिपोर्ट ही नहीं गई है। वहीं, किसी को अभी तक नोटिस नहीं दिया गया है। उनके टैक्स की गणना ही नहीं हुई है। जब तक टैक्स की जिम्मेदारी तय नहीं होती है, तब तक किसी से पैसा लेना-देना नहीं माना जाता है।
इसके बाद भी विभिन्न् माध्यमों से अपील करने का अधिकार संबंधित व्यक्ति को होता है। इस मामले में इस प्रकार के प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी ध्यान नहीं रखा गया है। अधिकारियों की ओर से शासन को पक्ष रखने संबंधी मामले की पुष्टि हुई है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं की जा रही है।

