MP हाई कोर्ट के सामने अहम सवाल: जनप्रतिनिधि पर दर्ज मुकदमा वापस लेने पर क्या सह-आरोपियों को भी मिलेगा लाभ?
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सांसदों और विधायकों (जनप्रतिनिधियों) से जुड़े आपराधिक मुकदमों की वापसी को लेकर दो अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सवाल सामने आए हैं। हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने इन संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के लिए अगली सुनवाई 4 नवंबर तय की है।
हाई कोर्ट के सामने उठे दो मुख्य कानूनी सवाल
सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों की निगरानी के दौरान युगलपीठ के सामने निम्नलिखित बिंदु विचारणीय बने हैं:
सह-आरोपियों पर असर: यदि किसी आपराधिक मामले में सांसद या विधायक के साथ अन्य लोग भी आरोपी हैं, और सरकार जनप्रतिनिधि का मुकदमा वापस लेती है-तो क्या इस वापसी का लाभ केवल जनप्रतिनिधि तक सीमित रहेगा या उसके सह-आरोपियों को भी मिलेगा?
हाई कोर्ट की अनुमति की अनिवार्यता: यदि राज्य सरकार जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमा वापस लेना चाहती है, तो इस पर अंतिम निर्णय संबंधित विशेष अदालत (Special Court) करेगी या इसके लिए हाई कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी?
प्रदेश में 19 में से 4 मामलों का हुआ निपटारा
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने आंकड़े पेश किए, प्रदेश में जनप्रतिनिधियों से संबंधित कुल 19 आपराधिक मामले लंबित थे। इनमें से 3 मामलों का अंतिम निराकरण संबंधित विशेष अदालतों द्वारा किया जा चुका है। 1 अन्य मामला हाई कोर्ट से निरस्त हो चुका है।
अब आगामी 4 नवंबर की सुनवाई में हाई कोर्ट इन महत्वपूर्ण कानूनी सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।











