62 साल की नौकरी का दावा खारिज: शेखर चंद्र वर्मा समेत 14 याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला
MP High Court ने स्कूल शिक्षा विभाग की retirement age पर फैसला सुनाया। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच ने 14 याचिकाएं खारिज कीं। कोर्ट ने 62 साल की नौकरी का दावा नहीं माना। लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक शेखर चंद्र वर्मा मुख्य याचिकाकर्ता थे। अंतरिम आदेश के दौरान मिला वेतन वापस नहीं होगा। पेंशन 60 साल के आधार पर बनेगी।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर लंबे समय से चल रहे 14 मामलों का एक साथ फैसला किया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच ने शेखर चंद्र वर्मा बनाम मध्य प्रदेश राज्य को मुख्य मामला मानते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। इन मामलों में कर्मचारियों ने 60 साल की जगह 62 साल तक सेवा में बने रहने का अधिकार मांगा था।
समझें क्या है पूरा मामला
हाईकोर्ट में 14 याचिकाओं में 60 की जगह 62 साल तक सेवा का लाभ मांगा गया था।
. याचिकाकर्ताओं का दावा था कि वे स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें बढ़ी हुई उम्र का लाभ मिलना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि केवल प्रशासनिक पद पर काम करना किसी कर्मचारी को शासकीय शिक्षक नहीं बनाता।
जिन मामलों में 20 साल की जरूरी शैक्षणिक सेवा पूरी नहीं हुई, वहां भी 62 साल की उम्र का लाभ नहीं मिलेगा।
अंतरिम आदेश के कारण 60 साल के बाद किया गया काम का वेतन वापस नहीं लिया जाएगा, लेकिन पेंशन 60 साल की उम्र के आधार पर तय होगी। 62 साल की नौकरी का दावा खारिज: शेखर चंद्र वर्मा समेत 14 याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला


















