आजादी के 80 साल बाद इतिहास: असम के डिब्रूगढ़ से बांग्लादेश के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग कार्गो रवाना

आजादी के 80 साल बाद इतिहास: असम के डिब्रूगढ़ से बांग्लादेश के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग कार्गो रवाना

डिब्रूगढ़: आजादी के लगभग आठ दशक बाद पूर्वोत्तर भारत के व्यापारिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। असम के डिब्रूगढ़ स्थित बोगीबील टर्मिनल से बांग्लादेश के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग कार्गो (Cargo) खेप को रवाना किया गया। केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बोगीबील टर्मिनल से इस ऐतिहासिक यात्रा को हरी झंडी दिखाई, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए।

1,080 टन मेथनॉल लेकर ढाका रवाना हुए जहाज

इस पहली अंतरराष्ट्रीय खेप में असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL) द्वारा निर्मित 1,080 टन मेथनॉल भेजा जा रहा है:

30 साल से बेकार पड़े जहाजों का हुआ कायाकल्प

इस यात्रा का एक बेहद दिलचस्प और सराहनीय पहलू यह रहा कि इसमें इस्तेमाल हो रहे दोनों जहाज असम सरकार के अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) विभाग के थे, जो बीते 30 वर्षों से बेकार पड़े थे। APCL ने इन्हें लीज पर लिया और गुवाहाटी के पांडू में मरम्मत कराकर पुन: व्यावसायिक परिचालन के लायक बनाया।

ब्रिटिश काल के ऐतिहासिक व्यापारिक मार्ग का पुनरुद्धार

ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी ऊपरी असम के व्यापार की लाइफलाइन हुआ करती थी और डिब्रूगढ़ एक प्रमुख नदी बंदरगाह था। चाय, लकड़ी और अन्य उत्पादों की ढुलाई इसी मार्ग से होती थी। 1947 में देश के विभाजन के बाद यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बंद हो गया था। अब 80 साल बाद इस कनेक्टिविटी को आधुनिक स्वरूप में बहाल किया गया है।

बोगीबील टर्मिनल की बड़ी परीक्षा और भविष्य की संभावनाएं

केंद्र सरकार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) बोगीबील को पूर्वोत्तर का प्रमुख लॉजिस्टिक हब बना रहे हैं। भविष्य में इस मार्ग से केवल मेथनॉल ही नहीं, बल्कि पॉलिमर, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, चाय, कृषि उत्पाद और असम के GI टैग वाले उत्पाद भी बांग्लादेश व अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजे जा सकेंगे।

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