GST 2.0: कारोबारियों को बड़ी राहत की तैयारी, 7 अक्टूबर की काउंसिल बैठक में छिन सकती है अफसरों की सीधे गिरफ्तारी की शक्ति

GST 2.0: कारोबारियों को बड़ी राहत की तैयारी, 7 अक्टूबर की काउंसिल बैठक में छिन सकती है अफसरों की सीधे गिरफ्तारी की शक्ति

नई दिल्ली: देश की व्यापारिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुगम (Ease of Doing Business) बनाने के लिए केंद्र सरकार GST कानूनों में बड़े सुधारों की योजना बना रही है। 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में टैक्स अधिकारियों की सीधे गिरफ्तारी की शक्ति को समाप्त करने और गंभीर टैक्स अपराधों के लिए ₹5 करोड़ की न्यूनतम सीमा तय करने जैसे क्रांतिकारी प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी।

इन सुधारों को ‘GST 2.0’ (Next-Generation GST Reforms) का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य कारोबारियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ और अनावश्यक कानूनी उत्पीड़न के डर से मुक्त कराना है।

प्रस्तावित बदलावों के 4 मुख्य बिंदु:

  1. अधिकारियों से छिनेगी सीधे गिरफ्तारी की शक्ति:

    • मौजूदा व्यवस्था: फर्जी इनवॉइस, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करने या टैक्स चोरी के मामलों में GST अधिकारी सीधे आरोपी को गिरफ्तार कर सकते हैं।

    • प्रस्तावित सुधार: अफसरों की मनमानी रोकने के लिए अब गिरफ्तारी से पहले अदालत (Court) की मंजूरी अनिवार्य की जा सकती है।GST 2.0: कारोबारियों को बड़ी राहत की तैयारी, 7 अक्टूबर की काउंसिल बैठक में छिन सकती है अफसरों की सीधे गिरफ्तारी की शक्ति

  2. ₹5 करोड़ से ऊपर के मामलों में ही होगी आपराधिक कार्रवाई:

    • आपराधिक (Criminal) मामलों की सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ या उससे अधिक की टैक्स चोरी तय करने पर विचार चल रहा है।

    • इससे छोटे टैक्स विवादों या व्याख्या संबंधी गलतियों को सीधे आपराधिक मामला बनाने के बजाय सिविल पेनल्टी और पेनल्टी रिकवरी के जरिए सुलझाया जाएगा।

  3. कारोबारियों की वर्षों पुरानी मांग होगी पूरी:

    • व्यापार जगत लंबे समय से मांग कर रहा था कि अनजाने में हुई गलतियों और जानबूझकर की गई फर्जीवाड़े की चोरी के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए।

    • आंकड़े: वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच केंद्रीय GST अधिकारियों ने 72,393 उल्लंघन के मामले दर्ज किए और 887 गिरफ्तारियां की थीं।

  4. फर्जीवाड़े और गंभीर धोखाधड़ी पर कसता रहेगा शिकंजा:

    • राहत का मतलब यह नहीं है कि जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों को छूट मिलेगी। ₹5 करोड़ से अधिक के बड़े घोटालों और संगठित टैक्स चोरी में कानूनी और आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी।

क्या होगा असर?

यदि GST काउंसिल इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है, तो देश के लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और बड़ी कंपनियों को अनजाने में हुए टैक्स विवादों में जेल जाने के डर से बड़ी राहत मिलेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों व कारोबारियों का भरोसा मजबूत होगा।

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