सरकारी कॉलेजों में गुरुजी गायब: MP में 55% सहायक प्राध्यापक और 77% प्रोफेसर के पद खाली, 100 से ज्यादा शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर

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सरकारी कॉलेजों में गुरुजी गायब: MP में 55% सहायक प्राध्यापक और 77% प्रोफेसर के पद खाली, 100 से ज्यादा शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था चरमरा गई है। प्रदेश के 571 सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इसके बावजूद 100 से अधिक प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक कक्षाओं में पढ़ाने के बजाय मंत्रालय, सतपुड़ा भवन, मंत्रियों के बंगलों और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) या संलग्नीकरण पर तैनात हैं।

MVM भोपाल का बुरा हाल, पढ़ाई प्रभावित राजधानी के प्रतिष्ठित शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) में प्राध्यापकों के 70 स्वीकृत पदों में से 20 पद खाली हैं। इनमें से तीन शिक्षक तो अतिरिक्त संचालक कार्यालय, सतपुड़ा भवन और मंत्रालय में प्रतिनियुक्ति पर हैं। शिक्षकों की इस कमी के कारण नए मल्टी डिसप्लिनरी (बहुविषयक) पाठ्यक्रमों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

आंकड़ों में समझें उच्च शिक्षा की तस्वीर:

  • सहायक प्राध्यापक: 12,895 स्वीकृत पदों में से 7,078 पद (लगभग 55%) खाली हैं।

  • प्राध्यापक (प्रोफेसर): 848 स्वीकृत पदों में से 650 पद (लगभग 77%) रिक्त हैं।

  • प्राचार्य (PG व स्नातक): 567 पदों में से 539 पद खाली हैं, यानी महज 23 नियमित प्राचार्य ही कार्यरत हैं।

  • कुल स्थिति: कुल 15,481 स्वीकृत पदों में से 9,004 पद खाली हैं और केवल 6,477 शिक्षक/अधिकारी ही कार्यरत हैं।

बिना पढ़ाए मिल रहा वरिष्ठ वेतनमान! नियमों के मुताबिक, सतपुड़ा भवन और वल्लभ भवन में प्रशासनिक कार्यों के लिए महज 4 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां 10 से अधिक शिक्षक सालों से जमे हुए हैं। कई सहायक प्राध्यापक वर्ष 2019 में नियुक्ति के बाद से ही सिर्फ विभागीय फाइलें निपटा रहे हैं। शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी के नियमों के अनुसार वरिष्ठ वेतनमान (पे मैट्रिक्स-11) के लिए 4 से 6 साल का अनिवार्य शिक्षण अनुभव चाहिए होता है। लेकिन बिना कॉलेज गए और बिना पढ़ाए ही इन शिक्षकों को वरिष्ठ वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है।

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मंत्रियों के यहां और विभागों में भी जमे हैं शिक्षक संस्कृति मंत्री के यहां सहायक प्राध्यापक सत्येन्द्र नरवरिया, संस्कृति विभाग में प्राध्यापक धर्मेन्द्र पारे और स्वराज संस्था में एसके वर्मा सालों से पदस्थ हैं। इसके अलावा सतपुड़ा भवन और अन्य विभागों में डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, शैलेंद्र कुमार मेश्राम, डॉ. विजय श्री बौद्ध, डॉ. अजय कुमार भारद्वाज सहित दर्जनों शिक्षक प्रशासनिक कामकाज संभाल रहे हैं।

ज़िम्मेदारों के बयान:

“एमपीपीएससी के माध्यम से सतत भर्ती प्रक्रिया जारी है। 3,600 अतिरिक्त पदों की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।”

— इन्दर सिंह परमार, उच्च शिक्षा मंत्री, मप्र

“महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में खाली पदों को भरा जा रहा है। प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसलिए कुछ प्राध्यापकों को सतपुड़ा या मंत्रालय में प्रतिनियुक्ति दी गई है। पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए 4,500 अतिथि विद्वानों की व्यवस्था की गई है।”

— अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग