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GST 2.0 से महंगाई में राहत और बाजार में गति-उपभोक्ता खर्च में बड़ा उछाल

GST 2.0 से महंगाई में राहत और बाजार में गति-उपभोक्ता खर्च में बड़ा उछाल

GST 2.0 से महंगाई में राहत और बाजार में गति-उपभोक्ता खर्च में बड़ा उछाल। सरकार GST 2.0 के तहत टैक्स स्लैब घटाकर केवल दो दरें लागू करने जा रही है. SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे सरकार को करीब 85,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है, लेकिन देश की खपत में 1.98 लाख करोड़ रुपये तक की वृद्धि होगी. आम जनता को महंगाई में राहत मिलेगी और बाजार मजबूत होगा।

Big Change In Tax Format: अब दो ही दरें: 5% और 18% पर टिकेगा भारत का GST सिस्टम, तंबाकू और पान मसाला पर लगेगा 40% का विशेष टैक्स

GST 2.0 से महंगाई में राहत और बाजार में गति-उपभोक्ता खर्च में बड़ा उछाल
केंद्र सरकार GST (वस्तु एवं सेवा कर) में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सरकार ने GST 2.0 नाम से नई योजना बनाई है, जिसे जल्दी ही राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में रखा जाएगा. इस बदलाव के बाद मौजूदा चार टैक्स स्लैब,5%, 12%, 18% और 28% को घटाकर सिर्फ दो स्लैब 5% और 18% कर दिया जाएगा. मतलब, पहले जिन चीजों पर 5% या 12% टैक्स लगता था, वो अब 5% स्लैब में आ जाएंगी. वहीं, जिन पर 28% टैक्स था, वे अब 18% स्लैब में आ जाएंगी।

इस बदलाव से आम लोगों को फायदा होगा क्योंकि सामान सस्ता होगा और उनकी खरीदारी बढ़ेगी. इससे बाजार में भी रफ्तार आएगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. सरकारी बैंक SBI ने भी एक रिपोर्ट में बताया है कि इस बदलाव से देश में कुल खपत में करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक का इजाफा हो सकता है।

रिपोर्ट में क्या बताया गया है?

एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि ये बदलाव सरकार को करीब 85,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे में डाल सकते हैं. लेकिन इस नुकसान के बावजूद देश की खपत यानी खरीददारी में करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक का बढ़ावा मिलने वाला है. इसका मतलब है कि बाजार में मांग बढ़ेगी और इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, रोजमर्रा की जरूरत की चीज़ों जैसे खाने-पीने की वस्तुएं और कपड़ों पर GST की दर 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी तक लाने की संभावना है. इससे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 0.2 से 0.5 फीसदी तक कम हो सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी और बाजार में महंगाई कम महसूस होगी. खासकर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट से आम आदमी को सबसे ज्यादा फायदा होगा.

इस लिए बदला जा रहा GST का नियम

अब तक GST में चार टैक्स स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% लागू हैं, जो अलग-अलग चीज़ों और सेवाओं पर लगते हैं. इससे टैक्स सिस्टम थोड़ा पेचिदा हो गया है और लोगों के लिए इसे समझना मुश्किल हो जाता है. सरकार का मकसद है कि टैक्स दरों को आसान और समझने में सरल बनाया जाए, ताकि टैक्स वसूलना बेहतर हो और लोग ज्यादा खरीदारी करें. SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुधारों के बाद GST की औसत दर घटकर लगभग 9.5% तक आ सकती है, जबकि अभी ये करीब 11.6% है.

अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

इस बदलाव की वजह से इस साल ही सरकार को करीब 45 हजार करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ सकता है. लेकिन टैक्स में कटौती और इनकम टैक्स में राहत मिलने से देश की कुल खपत 5.31 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है. यह भारत की कुल जीडीपी का करीब 1.6 प्रतिशत है. मतलब साफ है कि भले ही सरकार को थोड़ा नुकसान होगा, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी और बाजार मजबूत होगा.

नुकसानदेह वस्तुओं पर 40% टैक्स

सरकार ने पान मसाला, तंबाकू जैसी नुकसानदेह वस्तुओं पर भी खास ध्यान दिया है. GST 2.0 के तहत इन चीजों पर टैक्स दर काफी बढ़ाकर लगभग 40 फीसदी करने की योजना है. इसका मकसद न सिर्फ राजस्व बढ़ाना है, बल्कि इन हानिकारक उत्पादों की खपत को कम करना भी है. सरकार का कहना है इस भारी टैक्स इस लिए लगाया जा रहा है ताकि इनके इस्तेमाल को नियंत्रित किया जा सके और साथ ही सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिल सके. यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी अहम अच्छा माना जा रहा है.

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