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ग्लोबल टेंशन से IPO बाज़ार पर असर, ₹70,000 करोड़ के मेगा इश्यू पर अनिश्चितता

ग्लोबल टेंशन से IPO बाज़ार पर असर, ₹70,000 करोड़ के मेगा इश्यू पर अनिश्चितता

ग्लोबल टेंशन से IPO बाज़ार पर असर, ₹70,000 करोड़ के मेगा इश्यू पर अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के प्राइमरी मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है। देश में इस साल लगभग ₹70,000 करोड़ के बड़े IPO आने की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के कारण कंपनियां अपनी लिस्टिंग योजनाओं पर पुनर्विचार कर रही हैं।

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इस सूची में Jio Platforms, Flipkart Internet, Zepto, PhonePe और SBI Funds Management जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

ग्लोबल टेंशन से IPO बाज़ार पर असर, ₹70,000 करोड़ के मेगा इश्यू पर अनिश्चितता

सुस्त पड़ा IPO बाजार

2026 की पहली तिमाही में IPO के जरिए करीब ₹16,000 करोड़ जुटाए गए, जो पिछले साल के ₹19,000 करोड़ से कम है। इसके अलावा हालिया नौ IPO में से सात की लिस्टिंग कमजोर रही, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

कंपनियों की बढ़ी चिंता

बढ़ते वैश्विक तनाव और बाजार की अस्थिरता के चलते कंपनियां IPO लॉन्च के समय और वैल्यूएशन को लेकर सतर्क हो गई हैं। इसका उदाहरण PhonePe है, जिसने अनिश्चित माहौल के कारण अपने IPO को टालने का फैसला किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर ज्यादा सावधान हैं और कम कीमत की मांग कर रहे हैं, जिससे कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है।

 बड़े IPO दांव पर

Jio Platforms संभावित रूप से भारत का सबसे बड़ा IPO ला सकती है, जिससे करीब ₹40,000 करोड़ जुटाए जा सकते हैं।
Flipkart Internet भी घरेलू लिस्टिंग की तैयारी में है।
SBI Funds Management का IPO निवेशकों को म्यूचुअल फंड सेक्टर में सीधा निवेश का मौका दे सकता है।
Zepto लगभग ₹11,000 करोड़ जुटाने की योजना में है।

 निवेशकों का बदला रुख

बाजार में गिरावट के चलते निवेशक IPO की बजाय सुरक्षित माने जाने वाले बड़े शेयरों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। मिडकैप और ब्रॉडर मार्केट में कमजोरी से जोखिम लेने की क्षमता भी कम हुई है।

 आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सुस्ती अस्थायी है। IPO पाइपलाइन अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन कंपनियां सही समय और उचित वैल्यूएशन का इंतजार कर रही हैं।

कुल मिलाकर, अगर वैश्विक हालात जल्द स्थिर नहीं होते, तो आने वाले महीनों में कई बड़े IPO टल सकते हैं या उनकी कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

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