Friday, May 15, 2026
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Ganesh Chaturthi 2020: गणेश चतुर्थी पर इस तरह करें भगवान गणेश का पूजन

Ganesh Chaturthi 2020: आज गणेश चतुर्थी है। आज के दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

इस दिन पूजन करने की भी अलग विधि है जिसकी जानकारी हम आपके लिए यहां लाए हैं।

गणेश चतुर्थी का पूजन कैसे किया जाता है। लेकिन उससे पहले जानते हैं

गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त।

गणेश चतुर्थी की पूजन का शुभ मुहूर्त:

22 अगस्त 2020 की मध्याह्न में सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक। इस दिन घर पर मूर्ति की स्थापना की जाती है।

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ- 21 अगस्त 2020 रात 11 बजकर 02 मिनट से

चतुर्थी तिथि समाप्त- 22 अगस्त 2020 शाम 07 बजकर 57 मिनट तक

मूर्ति विसर्जन 1 सितंबर, 2020 को किया जाएगा।

22 अगस्त 2020 को चन्द्रोदय का समय- रात 9 बजकर 8 मिनट पर

 

इस तरह करें भगवान गणेश जी का पूजन:

  • इस दिन प्रात:काल स्नानादि नित्य कर्म से निवृत हो जाएं। फिर गणेश जी की प्रतिमा बनाएं।
  • यह प्रतिमा सोने, तांबे, मिट्टी या गाय के गोबर आदि से बनाई जा सकती है।
  • एक कलाश लें उसमें जल भरें। जल में सुपारी डालें और उसे कलश को कोरे कपड़े से बांध दें।
  • इस कलश को एक चौकी पर स्थापित करें। गणेश प्रतिमा की स्थापना भी इसी चौकी पर करें।
  • गणेश जी की प्रतिमा पर सिंदूर, केसर, हल्दी, चन्दन, मौली आदि चढ़ाएं। षोडशोपचार के साथ गणेश जी का पूजन करें।
  • गणेश जी को 21 लड्डुओं का भोग लगाएं और दक्षिणा अर्पित करें।
  • प्रतिमा के पास 5 लड्डू रखें और बाकी के ब्राह्मणों में बांट दें।
  • गणेश जी की पूजा मध्याह्न के समय करनी चाहिए।
  • फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। उन्हें दक्षिणा भी दें। फिर शाम के समय गणेश जी की विधिवत पूजा करें।
  • फिर गणेश जी की कथा और गणेश चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में गणेश जी की आरती करें और “ओम् गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। यह जाप एक माला तक करें।
  • पूजा के पश्चात सायंकाल में चंद्रमा को अर्घ्य दें। ध्यान रहे चंद्रमा को अर्घ्य देते समय दृष्टि नीची रखें।
  • मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए।
  • गणपति बप्पा को सिंदूर भी अर्पित करें। साथ ही 21 दूर्वा दल भी अर्पित करें। 21 लड्डूओं का भोग लगाएं।
  • 5 लड्डू भगवान गणेश को अर्पित करें बाकी के लड्डू गरीबों में बांट दें।
  • शाम के समय भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन करें। इस दिन कथा और गणेश चालीसा पढ़ने का अलग ही महत्व होता है।
  • संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी अवश्य करें।
  • इस दिन शाम को गाय बछड़े के पूजन और जौ व सत्तू का भोग लगाने का भी अपना ही अलग महत्व है।
  • माना जाता है कि इस दिन गेहूं एवं चावल, गाय के दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए ।

 

 

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम