Fuel Price Inversion: रिटेल और बल्क डीजल में ₹54 का भारी अंतर; उद्योगपतियों की चालाकी से सरकारी तेल कंपनियों को रोज 550 करोड़ का नुकसान, केंद्र सख्त
Fuel Price Inversion: रिटेल और बल्क डीजल में ₹54 का भारी अंतर; उद्योगपतियों की चालाकी से सरकारी तेल कंपनियों को रोज 550 करोड़ का नुकसान, केंद्र सख्त
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत सरकार ने आम जनता, किसानों और नौकरीपेशा वर्ग को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा हुआ है। लेकिन अब इस बड़ी राहत का फायदा उठाकर बड़े उद्योगों ने एक नया ‘खेल’ शुरू कर दिया है।Fuel Price Inversion: रिटेल और बल्क डीजल में ₹54 का भारी अंतर; उद्योगपतियों की चालाकी से सरकारी तेल कंपनियों को रोज 550 करोड़ का नुकसान, केंद्र सख्त
मुनाफे के लालच में कई औद्योगिक इकाइयां थोक (Bulk) सप्लाई का अपना कोटा छोड़कर सीधे आम जनता के लिए बने रिटेल पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीद रही हैं। इस चालाकी के कारण सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालात बिगड़ते देख अब केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को इस धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का सख्त अल्टीमेटम जारी कर दिया है।Fuel Price Inversion: रिटेल और बल्क डीजल में ₹54 का भारी अंतर; उद्योगपतियों की चालाकी से सरकारी तेल कंपनियों को रोज 550 करोड़ का नुकसान, केंद्र सख्त
₹54 का बड़ा अंतर बना हेराफेरी की मुख्य वजह
इस पूरी गड़बड़ी के पीछे रिटेल और बल्क डीजल की कीमतों में आसमान और पाताल का अंतर है। 28 मई 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार:
| डीजल का प्रकार | दिल्ली में कीमत (प्रति लीटर) | दर का निर्धारण |
| आम जनता के लिए (Retail) | ₹95.20 | सरकार द्वारा नियंत्रित (राहत के लिए) |
| उद्योगों के लिए (Bulk) | ₹149.00 | अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार |
सीधा गणित: उद्योगों को मिलने वाले थोक डीजल और आम आदमी के डीजल में प्रति लीटर सीधे ₹54 का भारी अंतर है। यही वजह है कि फैक्ट्रियां और बड़ी औद्योगिक इकाइयां बल्क सप्लायर्स के बजाय आम पेट्रोल पंपों पर अपनी गाड़ियां और टैंकर भेजकर सस्ते में तेल बटोर रही हैं।
तेल कंपनियों को रोजाना ₹550 करोड़ का तगड़ा झटका
बड़े पैमाने पर हो रही इस री-रूटिंग का सबसे बड़ा नुकसान देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) जैसे IOCL, BPCL और HPCL को उठाना पड़ रहा है।
- सब्सिडी का गलत इस्तेमाल: जो वित्तीय राहत और सब्सिडी सरकार अपनी जेब से आम उपभोक्ताओं के लिए दे रही थी, उसे अब उद्योग अपने मुनाफे में बदल रहे हैं।
- दैनिक घाटा: आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (LPG) पर इन सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना औसतन ₹550 करोड़ का भारी घाटा उठाना पड़ रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।
‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत चलेगा कानूनी डंडा: सरकार का एक्शन प्लान
आम जनता के हिस्से के डीजल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है। सरकार ने राज्यों को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- सघन निगरानी और फ्लाइंग स्क्वाड: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पेट्रोल पंपों की सघन जांच के लिए विशेष टीमें बनाने को कहा गया है।
- कठोर कार्रवाई: यदि कोई भी पेट्रोल पंप मालिक या औद्योगिक इकाई कालाबाजारी, अवैध भंडारण या थोक की जगह खुदरा ईंधन की अवैध खरीद-फरोख्त में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पैनिक होने की जरूरत नहीं: सरकार ने आम उपभोक्ताओं को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक (Buffer Stock) मौजूद है, इसलिए किसी भी प्रकार की जमाखोरी या ईंधन की किल्लत की अफवाहों पर ध्यान न दें।

