Fuel Crisis Effect: भारत में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड में उछाल, मार्च में EV शेयर 5.1% पहुंचा

Fuel Crisis Effect: भारत में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड में उछाल, मार्च में EV शेयर 5.1% पहुंचा। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ रही है। मार्च 2026 में बेची गई नई कारों में EV की हिस्सेदारी बढ़कर 5.1% हो गई, जो फरवरी के 3.5% से काफी ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर Strait of Hormuz क्षेत्र में संकट के चलते तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। इसका असर सीधे तौर पर ग्राहकों की पसंद पर पड़ा है, जो अब पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर रुख कर रहे हैं।

Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में EV रजिस्ट्रेशन 68% बढ़कर 22,490 यूनिट तक पहुंच गया।

 कंपनियों ने क्या कहा

Tata Motors के पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी शैलेश चंद्र के मुताबिक, ग्राहकों को भविष्य में फ्यूल की कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता है, जिसके चलते इलेक्ट्रिक कारों की मांग में 20-30% तक बढ़ोतरी देखी गई है।

वहीं JSW MG Motor India के एमडी अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि अब ज्यादातर ग्राहक शोरूम में आते ही EV को अपनी पहली पसंद मान रहे हैं। कंपनी ने मार्च में ग्राहक दिलचस्पी में 26% की बढ़ोतरी दर्ज की है।

क्यों बढ़ रही है EV की डिमांड

ग्लोबल असर

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते तेल और गैस की कीमतें वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ रही हैं। Strait of Hormuz से गुजरने वाला दुनिया का लगभग 20% तेल और LNG प्रभावित हुआ है, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

आगे क्या?

ऑटो कंपनियां अब इलेक्ट्रिक सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही हैं—प्रोडक्शन बढ़ाने, लोकलाइजेशन को मजबूत करने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा हालात में इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं।

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