Fact Check: क्या बाजारों में बिक रहे हैं ‘जहरीले तरबूज’? जानें MP, UP और छत्तीसगढ़ में हुई मौतों का खौफनाक वायरल सच
Fact Check: क्या बाजारों में बिक रहे हैं ‘जहरीले तरबूज’? जानें MP, UP और छत्तीसगढ़ में हुई मौतों का खौफनाक वायरल सच। गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में पानी से लबरेज, लाल और रसीले तरबूजों की बहार आ जाती है। तपती धूप में शरीर को राहत देने वाला यह फल इन दिनों खुद एक सोशल मीडिया ‘आंच’ का सामना कर रहा है। दरअसल, फेसबुक से लेकर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी तक एक खौफनाक संदेश तेजी से तैर रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि देश के कई राज्यों में केमिकल युक्त ‘जहरीले तरबूज’ खाने से लोगों की जान जा रही है।
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इस अफवाह का असर यह हुआ कि फल मंडियों से खरीदार गायब होने लगे हैं और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। लेकिन जब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा गया और मेडिकल व प्रशासनिक रिपोर्ट सामने आई, तो सच कुछ और ही निकला। आइए, देश के अलग-अलग राज्यों से उड़ी इन अफवाहों और उनकी असलियत का एक ‘पोस्टमार्टम’ करते हैं।
1. मध्य प्रदेश (श्योपुर): तरबूज खाते ही पिता की मौत, बेटा गंभीर?
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अफवाह: श्योपुर में शाजापुर निवासी ड्राइवर इंद्र कुमार परिहार (43 वर्ष) और उनके बेटे विनोद (21 वर्ष) ने सुबह तरबूज खाया, जिसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई और पिता की मौत हो गई। इसे ‘जहरीले तरबूज’ की पुष्टि बताया गया।
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ग्राउंड रियलिटी (सच): स्थानीय स्तर पर भले ही इसे लोग तरबूज से जोड़ रहे हों, लेकिन डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल तरबूज खाने से किसी की तत्काल मौत नहीं हो सकती। मौत की असली और वास्तविक टॉक्सिकॉलोजी वजह जानने के लिए विसरा (Viscera) को सुरक्षित रख लिया गया है और पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है।
2. छत्तीसगढ़ (जांजगीर-चांपा): तरबूज से फैला जहर, 15 साल के बच्चे की मौत?
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अफवाह: जांजगीर-चांपा जिले में तरबूज खाने के बाद 15 वर्षीय अखिलेश की मौत हो गई और परिवार के तीन अन्य बच्चे अस्पताल पहुंच गए। दावा हुआ कि तरबूज में जानलेवा जहर था।
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ग्राउंड रियलिटी (सच): स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह सीधे तौर पर फल का आंतरिक जहर नहीं, बल्कि दूषित रख-रखाव का मामला है। डॉक्टरों के मुताबिक, कटे हुए तरबूज को लंबे समय तक असुरक्षित और गंदगी में रखने से उसमें E. coli (ई-कोलाई) जैसे खतरनाक बैक्टीरियल इन्फेक्शन और फूड बॉर्न पैथोजन पनप जाते हैं। यह गंभीर फूड पॉइजनिंग और इंफेक्शन का मामला है, न कि तरबूज में पहले से मौजूद किसी जहर का।
3. उत्तर प्रदेश (बिजनौर): तरबूज खाते ही युवती ने तोड़ा दम?
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अफवाह: बिजनौर के शेर नगर नरैनी गांव में सोशल मीडिया पर एक वीडियो और संदेश वायरल हुआ कि 21 साल की युवती मुस्कान की तरबूज खाते ही मौत हो गई। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
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ग्राउंड रियलिटी (सच): जब प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीएम (SDM) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की, तो इस प्रोपेगैंडा की पूरी पोल खुल गई। मृतका के पिता जिया उल हसन ने खुद सामने आकर सोशल मीडिया के दावों का पूरी तरह खंडन किया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थी और उसकी मौत ‘हार्ट अटैक’ से हुई थी, न कि तरबूज खाने से। दुखी पिता ने उनकी बेटी की मौत पर झूठ फैलाने वाले अफवाहबाजों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
4. मुंबई: ‘तरबूज कांड’ में पूरे परिवार का खात्मा?
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अफवाह: मुंबई के पायधुनी (जे.जे. मार्ग) इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों (अब्दुल्ला डोकडिया, उनकी पत्नी नसरीन और दो बेटियां) की संदिग्ध मौत हो गई। अफवाह उड़ी कि रात में चिकन बिरयानी खाने के बाद इन्होंने तरबूज खाया था, जिससे शरीर में खतरनाक केमिकल रिएक्शन हुआ।
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ग्राउंड रियलिटी (सच): पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की फॉरेंसिक जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि यह मौतों का सिलसिला किसी फल या खाने के कॉम्बिनेशन से नहीं हुआ था। मामले की जांच गहनता से जारी है, लेकिन मेडिकल साइंस में चिकन और तरबूज के साथ खाने से मौत होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
विशेषज्ञों की सलाह: डरें नहीं, पर बरतें ये सावधानियां
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) और डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज को देखकर डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, लेकिन इस मौसम में खान-पान को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है:
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कटा हुआ तरबूज न खरीदें: बाजारों में सड़क किनारे धूल-मिट्टी में बिकने वाले पहले से कटे और असुरक्षित तरबूज बिल्कुल न खरीदें। इनमें बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं।
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केमिकल इंजेक्शन की पहचान: यदि तरबूज काटने पर अंदर का हिस्सा अत्यधिक चमकीला लाल दिखे, बीच में बड़ी दरार या अजीब सा पाउडर दिखे, और स्वाद में कड़वाहट या कृत्रिम मिठास लगे, तो उसे खाने से बचें। तरबूज को घर लाकर पहले कुछ देर पानी में डुबोकर रखें।
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अफवाहों पर न दें ध्यान: सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर आने वाले किसी भी बिना पुष्टि वाले संदेश को आगे फॉरवर्ड न करें।

