DIGILocker Update: विद्यार्थियों की अंकसूची डिजिटल फार्मेट में डीजी लाकर में रखी जा रही, नेड में किया स्टोर
DIGILocker Update: विद्यार्थियों की अंकसूची डिजिटल फार्मेट में डीजी लाकर में रखी जा रही, नेड में स्टोर किया । उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के आनलाइन दस्तावेजों को सहेजने के लिए डिजिटल लाकर की सुविधा शुरू की है। विश्वविद्यालय और कालेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की अंकसूची डिजिटल फार्मेट में डीजी लाकर में रखी जा रही है। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में यह प्रक्रिया आरंभ हो गई है। एमपी आनलाइन के माध्यम से अब तक 16.5 लाख विद्यार्थियों का डेटा अपलोड किया गया है।
2018 से 2022 के बीच का डेटा अपलोड
2018 से 2022 के बीच का डेटा अपलोड किया जा चुका है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने अकेले इस अवधि में एक लाख 53 हजार विद्यार्थियों का डेटा अपलोड किया है। विश्वविद्यालय और कालेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की अंकसूची को जिस डिजिटल लाकर में रखा गया है उसे बदलने की तैयारी हो रही है। केंद्र सरकार के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों को डेटा नए सिरे से एपीआइ में दर्ज डेटा को नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी (नेड) में स्टोर किया जाएगा।
नए सत्र से खुलेगा डीजी लाकर
एकाउंट कई विद्यार्थियों का आधार और मोबाइल नंबर मिलान नहीं होने से भी डिजिटल लाकर नहीं खुल रहा है। जिन विद्यार्थियों को डीजी लाकर की सुविधा के बारे में जानकारी नहीं है। शिक्षण संस्थान अब इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने नए प्रवेश प्रक्रिया में आनलाइन फार्म भरवाने के साथ ही एक विकल्प डीजी लाकर खाता खुलवाने के संबंध में भी जानकारी भरवाई जाएगी।
इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी धीरेंद्र शुक्ला ने बताया कि नए प्रवेश में डीजी लाकर खाता खुलवाने के लिए सुविधा दी जाएगी। प्रो. शुक्ला ने बताया कि डीजी लाकर का अभी तक एपीआइ में दर्ज हो रहा था जिसे केंद्र सरकार के निर्देश पर एकेडमिक डिपाजिटरी में शिफ्ट करने के निर्देश हैं। इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया जा रहा है।
2024 में समझ में आएगी उपयोगिता
उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी प्रो. धीरेंद्र शुक्ला ने कहा कि 2024 में जब विद्यार्थियों का स्नातक पूर्ण होगा उसके बाद उन्हें डिजिटल लाकर की सुविधा समझ में आएगी। इस लाकर में विद्यार्थियों के हर वर्ष और सेमेस्टर की अंकसूची अपलोड होगी जिसे कहीं भी विद्यार्थी आनलाइन खोल सकता है। विद्यार्थी के आधार कार्ड और मोबाइल के माध्यम से एकाउंट खुलेगा। मोबाइल पर ओटीपी आएगी जिसे आनलाइन दर्ज करने पर लाकर खुलता है।फिलहाल कई विद्यार्थियों का आधार नंबर और मोबाइल नंबर का मिलान नहीं होने से लाकर नहीं खुल रहा है। —–
डीजी लाकर में अभी एमपी आनलाइन के माध्यम से एपीआइ के माध्यम से डेटा दर्ज हो रहा था। अब उच्च शिक्षा विभाग ने नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी के यह डेटा अपलोड करना चाहिए। यह प्रक्रिया बीच में बदलने से थोड़ी दिक्कत तो आएगी। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने अब तक 1.53 लाख विद्यार्थियों का डेटा अपलोड किया है।
डा. रश्मि मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक रादुवि
डीजी लाकर का डेटा प्रदेश में अभी तक 16.6 लाख विद्यार्थियों का अपलोड हो चुका है लेकिन इसे नेड में शिफ्ट करने के निर्देश मिले हैं। इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है। 2024 में जब विद्यार्थी पासआउट होंगे तब उन्हें डीजी लाकर की सुविधा समझ में आएगी।
प्रो.धीरेंद्र शुक्ला, नोडल अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग।

