मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन पर घमासान: प्रशांत भूषण बोले- ‘हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं’, राजनाथ सिंह ने किया पलटवार
लखनऊ/नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी व प्रदर्शनकारी समूहों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी और प्रदर्शनकारी समूह देश में बांग्लादेश की तर्ज पर अराजकता फैलाना चाहते हैं।
प्रशांत भूषण का बयान: “हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं”
गुरुवार शाम आइसा (AISA) की नेहा बोरा और सीजीपी (CJP) के अभिजीत दीपके के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने बीजेपी के आरोपों पर खुलकर जवाब दिया।
लोकतंत्र में असंतोष अपराध नहीं: प्रशांत भूषण ने कहा, “हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाना कोई अपराध नहीं है।”
तानाशाही के खिलाफ लड़ाई: उन्होंने तर्क दिया कि यह आंदोलन अब लोकतंत्र को कुचलने वाली तानाशाही सरकार के खिलाफ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई बन चुका है।
बीजेपी के पुराने आंदोलनों का हवाला: भूषण ने सवाल उठाया कि जब बीजेपी ने खुद सत्ता में आने के लिए कई आंदोलन चलाए थे, तो अब सत्ता परिवर्तन की बात को ‘साजिश’ क्यों कहा जा रहा है? उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन जितना दबाने की कोशिश करेगा, उतने ही ज्यादा लोग सड़कों पर उतरेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पलटवार: “बांग्लादेश की तर्ज पर अराजकता फैलाने की कोशिश”
प्रशांत भूषण के बयान पर शुक्रवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने करारा हमला बोला:
बांग्लादेश जैसी साजिश का आरोप: राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों का असली मकसद सामने आ चुका है। ये समूह देश के युवाओं को मोहरा बनाकर बांग्लादेश की तर्ज पर ‘सत्ता परिवर्तन’ और अराजकता फैलाना चाहते हैं।
संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश: उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग खुलेआम बांग्लादेश से प्रेरणा लेने और सरकार गिराने की बात कर रहे हैं, जिससे उनका असली एजेंडा उजागर हो गया है।
राहुल गांधी को चेतावनी: रक्षा मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को चेतावनी देते हुए कहा, “लोकतंत्र का मतलब अराजकता फैलाना, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाना या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालना नहीं है।”














