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संसद में संविधान संशोधन पर घमासान: महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली।संसद में संविधान संशोधन पर घमासान: महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने।संसद के विशेष सत्र में संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण, सीटों की बढ़ोतरी और परिसीमन को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।

संसद में संविधान संशोधन पर घमासान: महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

मतविभाजन में समर्थन और विरोध

लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने जानकारी दी कि विधेयकों पर मतविभाजन के दौरान
251 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि
185 सांसदों ने विरोध में वोट दिया

सरकार का पक्ष: ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी

चर्चा की शुरुआत करते हुए कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने कहा कि सरकार देश में महिला सशक्तिकरण और बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बताया कि:महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित हो चुका हैइसे 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा प्रस्ताव के मुताबिक:लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर करीब 815 की जा सकती हैइनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

मेघवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव से किसी भी राज्य की वर्तमान सीटों में कमी नहीं होगी।

गृह मंत्री का भरोसा

गृह मंत्री Amit Shah ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि
“पूरी चर्चा और सहमति के बाद ही संविधान में संशोधन किया जाएगा” उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना में जाति से जुड़े पहलुओं पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।

विपक्ष का हमला

वहीं विपक्ष ने सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने कहा किमहिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं हैयदि सरकार चाहती तो इसे 2024 में ही लागू किया जा सकता था

गोगोई ने आरोप लगाया कि“सरकार महिला आरक्षण के नाम पर पीछे के रास्ते से परिसीमन लागू करना चाहती है”

राजनीतिक दांव-पेच तेज

सूत्रों के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहा है।

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

क्या बदल सकता है?

अगर ये विधेयक लागू होते हैं, तो:संसद में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा इजाफा होगालोकसभा की सीटों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती हैदश की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव आएगासंसद में चल रही यह बहस सिर्फ एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे और भविष्य की राजनीति को तय करने वाली अहम कड़ी बन सकती है।अब सभी की नजर इस पर है कि चर्चा के बाद सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या टकराव और बढ़ता है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि